तुमको देखे हुए ग़ुज़रे हैं ज़माने आओ

November 6, 2005

Lyrics:
Singer: Abida Parveen

तुमको देखे हुए ग़ुज़रे हैं ज़माने आओ
उम्र-ए-रफ़्ता का कोई ख़्वाब दिखाने आओ

मैं सराबों में भटकता रहूँ सहरा-सहरा
तुम मेरी प्यास को आईना दिखाने आओ।

अजनबयती ने कई दाग़ दिए हैं दिल को
आशनाई का कोई ज़ख़्म लगाने आओ।

मिलना चाहा तो किए तुमने बहाने क्या-क्या
अब किसी रोज़ न मिलने के बहाने आओ।

सराब = Mirage
सहरा = Desert
उम्र-ए-रफ़्ता = Past


जब से तूने मुझे दीवाना बना रखा है

November 6, 2005

Lyrics: Nasir Haquim
Singer: Abida Parveen

जब से तूने मुझे दीवाना बना रखा है
संग पर शख़्स ने हाथों में उठा रखा है।

उसके दिल पर भी कड़ी इश्क में गुज़री होगी
नाम जिसने भी मोहब्बत का सज़ा रखा है।

पत्थरों आज मेरे सर पर बरसते क्यों हो?
मैंने तुमको भी कभी अपना ख़ुदा रखा है।

पी जा अय्याम की तलख़ी को भी हँस के ‘नासिर’
ग़म को सहने में भी क़ुदरत ने मज़ा रखा है।

अय्याम = Life
तलख़ी = Bitternetss


गुलशन-गुलशन शोला-ए-ग़ुल की

October 25, 2005

Lyrics: Asghar Saleem
Singer: Mehdi Hasan

गुलशन-गुलशन शोला-ए-ग़ुल की ज़ुल्फ़-ए-सबा की बात चली
हर्फ़-ए-जुनूँ की बंद-गिराँ की ज़ुल्म-ओ-सज़ा की बात चली।

ज़िंदा-ज़िंदा शोर-ए-जुनूँ है मौसम-ए-गुल के आने से
महफ़िल-महफ़िल अबके बरस अरबाब-ए-वफ़ा की बात चली।

अहद-ए-सितम है देखें हम आशुफ़्ता-सरों पर क्या गुजरे
शहर में उसके बंद-ए-क़बा के रंग-ए-हिना की बात चली।

एक हुआ दीवाना एक ने सर तेशे से फोड़ लिया
कैसे-कैसे लोग थे जिनसे रस्म-ए-वफ़ा की बात चली।

सबा=Breeze, wind
हर्फ़-ए-जुनूँ  = A word that describes craziness
अरबाब = Friends
अहद-ए-सितम = Days of Tyranny/Cruelty
आशुफ़्ता = Perplexed, Careworn, Distracted, Confused
आशुफ़्ता-सर = Mentally Deranged
क़बा = Gown, Long Coat Like Garment (I think it has been used in the sense of बुर्का here)
बंद-ए-क़बा = Locked in the gown/बुर्का
तेशे = Axe


नवाज़िश करम शुक्रिया मेहरबानी

October 19, 2005

Lyrics: Himayat Ali Shaer
Singer: Mehdi Hasan

नवाज़िश, करम, शुक्रिया मेहरबानी
मुझे बख़्श दी आपने ज़िन्दगानी।

जवानी की जलती हुई दोपहर में
ये ज़ुल्फ़ों के साये घनेरे-घनेरे
अजब धूप छाँव का आलम है तारी
महकता उजाला चमकते अँधेरे
ज़मीं का फ़ज़ा हो गई आसमानी

लबों की ये कलियाँ खिली-अधखिली सी
ये मख़मूर आँखें गुलाबी-गुलाबी
बदन का ये कुंदन सुनहरा-सुनहरा
ये कद है कि छूटी हुई माहताबी
हमेशा सलामत रहे या जवानी।

नवाज़िश = Kindness, Favor
तारी = Spreading, Happening
करम = Benevolence, Benignity
मख़मूर = Drunk, Intoxicated


कैसे-कैसे लोग हमारे जी को जलाने आ जाते हैं

October 18, 2005

Lyrics: Munir Niazi
Singer: Mehdi Hasan

कैसे-कैसे लोग हमारे जी को जलाने आ जाते हैं,
अपने-अपने ग़म के फ़साने हमें सुनाने आ जाते हैं।

मेरे लिए ये ग़ैर हैं और मैं इनके लिए बेगाना हूँ
फिर एक रस्म-ए-जहाँ है जिसे निभाने आ जाते हैं।

इनसे अलग मैं रह नहीं सकता इस बेदर्द ज़माने में
मेरी ये मजबूरी मुझको याद दिलाने आ जाते हैं।

सबकी सुनकर चुप रहते हैं, दिल की बात नहीं कहते
आते-आते जीने के भी लाख बहाने आ जाते हैं।


मेरी मानो यारों मुझको

October 16, 2005

Lyrics:
Singer: Bhupinder Singh

मेरी मानो यारों मुझको आज न रोको पीने से
बेहोशी में मरना अच्छा होश में आ कर जीने से।

मैं प्यासा हूँ मुझे पिलाओ
जलते हैं जब दिल के घाव
आता हूँ मैखाने में,
जाम नहीं भरते तो आओ
कतरा कतरा ही टपकाओ
तुम मेरे पैमाने में
खाली जाम लगा रखा है मेरे अपने सीने से।

आज मेरे आँसू ना पोछो
अपने  हाल पे रो लेने दो
मुझ आवारा पागल को,
कैसे गले लगा लोगे तुम
कितनी देर सँभालोगे तुम
मय की ख़ाली बोतल को।
ठोकर मारो मुझे गिरा दो तुम अहसास के ज़ीने से।


कह दो इस रात से कि रुक जाए

August 19, 2005

Lyrics: Noor Dewasi
Singer: Runa Laila

कह दो इस रात से कि रुक जाए दर्द-ए-दिल मिन्नतों से सोया है
ये वही दर्द जिसे ले कर लैला तड़पी थी मजनू रोया है।

मैं भी इस दर्द की पुजारिन हूँ ये न मिलता तो कब की मर जाती
इसके इक-इक हसीन मोती को रात-दिन पलकों में पिरोया है।

यो वही दर्द है जिसे ग़ालिब जज़्ब करते थे अपनी गज़लों में
मीर ने जब से इसको अपनाया दामन-ए-ज़ीस्त को भिगोया है।


सुरमई शाम के उजालों से

August 18, 2005

Lyrics:
Singer: Runa Laila

सुरमई शाम के उजालों से जब भी सज-धज के रात आती है
बेवफ़ा, बेरहम ओ बेदर्दी जाने क्यों तेरी याद आती है।

इस जवानी ने क्या सज़ा पाई, रेशमी सेज हाय तनहाई,
शोख़ जज़्बात ले हैं अँगड़ाई,आँखें बोझल हैं नींद हरजाई,
तेरी तस्वीर तेरी परछाईं दे के आवाज़ फिर बुलाती है।

आज भी लम्हे वो मोहब्बत के गर्म साँसों से लिपटे रहते हैं,
अब भी अरमान तेरी चाहत के महकी ज़ुल्फ़ों में सिमटे रहते हैं,
तुझको भूलें तो कैसे भूलें हम बस यही सोच अब सताती है।

वो भी क्या दिन थे जब कि हम दोनों मरने-जीने का वादा करते थे
जाम हो ज़हर का कि अमृत का साथ पीने का वादा करते थे।
ये भी क्या दिन हैं क्या क़यामत है ग़म तो ग़म है ख़ुशी भी खाती है।


चराग़-ओ-आफ़ताब ग़ुम

August 17, 2005

Lyrics: Sudarshan Faakir
Singer: Jagjeet Singh

चराग़-ओ-आफ़ताब ग़ुम बड़ी हसीन रात थी
शबाब की नक़ाब गुम बड़ी हसीन रात थी।

मुझे पिला रहे थे वो कि ख़ुद ही शमाँ बुझ गई
गिलास ग़ुम,शराब ग़ुम बड़ी हसीन रात थी।

लिखा था जिस किताब कि इश्क़ तो हराम है
हुई वही किताब ग़ुम बड़ी हसीन रात थी।

लबों से लब जो मिल गए,लबों से लब ही सिल गए
सवाल ग़ुम जवाब ग़ुम बड़ी हसींन रीत थी।


वफ़ा का नाम ज़माने में आम कर जाऊँ

August 16, 2005

Lyrics:
Singer: Runa Laila

वफ़ा का नाम ज़माने में आम कर जाऊँ
फिर उसके बाद मैं ज़िंदा रहूँ कि मर जाऊँ।

इलाही मुझको अता कर सदाक़तों के चिराग़
मैं उनकी रोशनी लेकर नगर-नगर जाऊँ।

तेरी जमीं पे न हो नाम नफ़रतों का कहीं
मोहब्बतों के फ़साने सुनूँ जिधर जाऊँ।

मेरे वज़ूद ये भी तो एक मसरफ़ है
दिलों में प्यार की मानिंद मैं उतर जाऊँ।

मज़ा तो जब है कि दुश्मन भी मुझको याद करे
मिसाल प्यार की ऐसी मैं छोड़ कर जाऊँ।

अता कर = Give
सदाक़त = Truth
मसरफ़ = Outlay