August 14, 2005
Lyricist:
Singer: Runa Laila
वादियाँ-वादियाँ, रास्ते-रास्ते
मारे मारे फिरे हम तेरे वास्ते।
आबशारों से पूछा कहाँ हैं सनम
और नज़ारों के जा जा के पकड़े क़दम
इन बहारों ने फ़रमाया क्या जाने हम
खा रहा है हमें अब जुदाई का ग़म।
छाले पड़ते गए भागते-भागते।
मचली जाएँ लटें, लिपटी जाए हवा
जलता जाए बदन, रोती जाए वफ़ा
बेवफ़ा मत सता मिल भी जा आ भी जा
कि ख़ता क्या बता क्यों ये दे दी सज़ा।
आँखें पथरा गईं जागते-जागते।
No Comments » |
Uncategorized |
Permalink
Posted by Jaya
August 9, 2005
Lyricist:
Singer: Mehdi Hasan
जो ग़म-ए-हबीब से दूर थे वो ख़ुद अपनी आग में जल गए
जो ग़म-ए-हबीब को पा गए वो ग़मों से हँस के निकल गए।
–
जो थके थके से थे हौसले वो शबाब बन के मचल गए
जो नज़र नज़र से गले मिली तो बुझे चिराग भी जल गए।
ये शिक़स्त-ए-दीद की करवटें भी बड़ी लतीफ़-ओ-ज़मील
मैं नज़र झुका के तड़प गया वो नज़र बचा के निकल गए।
न ख़िज़ाँ में है कोई तीरगी न बहार में है कोई रोशनी
ये नज़र-नज़र के चिराग हैं कहीं बुझ गए कहीं जल गए।
जो सँभल-सँभल के बहक गए वो फ़रेब ख़ुर्द-ए-राह थे
वो मक़ाम इश्क को पा गए जो बहक बहक के सँभल गए।
जो खिले हुए हैं रविश-रविश वो हज़ार हुस्न-ए-चमन सही
मग़र उन गुलों का जवाब क्या जो क़दम-क़दम पे कुचल गए।
न है शायर अब ग़म-ए-नौ-ब-नौ न वो दाग़-ए-दिल न वो आरज़ू
जिन्हें एतमाद-ए-बहार था वो ही फूल रंग बदल गए।
–
हबीब = Beloved, Sweetheart
शिक़स्त = Breach, Breakage, Defeat
दीद = Sight
लतीफ़ = Juicy, Pleasant
ज़मील = Bonny, Attractive, Appealing
ख़िज़ाँ = Autumn, Decay
तीरगी = Darkness
ख़ुर्द = Little
रविश = The narrow pathways of the garden
नौ-ब-नौ = New, Fresh, Raw
एतमाद = Faith
9 Comments |
ज |
Permalink
Posted by Jaya
August 6, 2005
Lyricist:
Singer: Mehdi Hasan
जब कोई प्यार से बुलाएगा
तुमको एक शख़्स याद आएगा।
लज़्ज़त-ए-ग़म से आशना होकर
अपने महबूब से जुदा हो कर
दिल कहीं जब सुकून न पाएगा
तुमको एक शख़्स याद आएगा।
तेरे लब पे नाम होगा प्यार का
शमा देखकर जलेगा दिल तेरा
जब कोई सितारा टिमटिमाएगा
तुमको एक शख़्स याद आएगा।
ज़िन्दग़ी के दर्द को सहोगे तुम
दिल का चैन ढूँढ़ते रहोगे तुम
ज़ख़्म-ए-दिल जब तुम्हें सताएगा
तुमको एक शख़्स याद आएगा।
No Comments » |
Uncategorized |
Permalink
Posted by Jaya
July 26, 2005
Lyricist:
Singer: Ghulam Ali
अपनी ग़ज़लों में तेरा हुस्न सुनाऊँ आ जा
आ ग़म-ए-यार तुझे दिल में बसाऊँ आ जा।
बिन किए बात तुझे बात सुनाकर दिल की
तेरी आँखों में हया रंग सजाऊँ आ जा।
अनछुए होंठ तेरे एक कली से छू कर
उसको मफ़हूम नज़ाक़त से मिलाऊँ आ जा।
मैंने माना कि तू साक़ी है मैं मैकश तेरा
आज तू पी मैं तुझे जाम पिलाऊँ आ जा।
हीर वारिस की सुनाऊँ मैं तुझे शाम ढले
तुझमें सोए हुए जज़्बों को जगाऊँ आ जा।
ऐं मेरे सीने में हर आन धड़कती ख़ुशबू
आ मेरे दिल में तुझे तुझसे मिलाऊँ आ जा।
–
मफ़हूम = To be taken to mean, Understood
हीर वारिस की: This is an explanation and not a meaning. The famous Punjabi poetry “Heer Ranjha” was written by Warris Shah. This is what is being referred to here.
आन = Moment
6 Comments |
अ |
Permalink
Posted by Jaya
July 25, 2005
Lyricist:Ahsoor??
Singer: Ghulam Ali
तुम आ गए हो ऐ शह-ए-ख़ूबाँ ख़ुशामदीद
महका है आज दिल का गुलिस्ताँ ख़ुशामदीद।
उतरा है मेरी रूह के आँगन मे सैल-ए-नूर
गुरबत कदे में जश्न-ए-चरागाँ ख़ुशामदीद।
मिस्ल-ए-नसीम सुबह-ए-चमन हों सुबक खराम
इक इक क़दम नवेद-ए-बहाराँ ख़ुशामदीद।
जज़्बों को फिर यक़ीन की दौलत मिली आज
वजह-ए-करार-ए-क़ल्ब परीशाँ ख़ुशामदीद।
बरसों के बाद दिल में उजालों की है नुमू
मेहर-ए-मुनीर नैयर ताबाँ ख़ुशामदीद।
जाना तुम्हारी चश्म-ए-मोहब्बत का फ़ैज़ है
‘आशूर’ भी है आज ग़ज़लफ़ाँ ख़ुशामदीद।
–
ख़ूबाँ = The fair, The beautiful, Sweetheart, Lady-love
ख़ुशामदीद = Welcome
सैल = Short for सैलाब = Flood, Deluge, Torrent
नूर = Bright, Light, Luminescence, Luster, Refulgence
गुरबत = Exile
कद = A retreat, A den, A cavern
मिस्ल = Analogous, Example, Like, Record, Resembling
नसीम = Gentle Breeze, Zephyr
सुबक खराम = Jink
नवेद = Good News
नवेद-ए-बहाराँ = Call of Spring
क़ल्ब = Heart
वजह-ए-करार-ए-क़ल्ब = The reason of the calmness of the heart
परीशाँ = Having the disposition of a fairy, Like fairy
नुमू = Growth
मेहर-ए-मुनीर = Sunlight
नैयर = Lightsome, Luminous
ताबाँ = Hot, Burning, Light, Luminous, Shining, Radiant
चश्म = Eye
फ़ैज़ = Favour
No Comments » |
त |
Permalink
Posted by Jaya
July 23, 2005
Lyricist:
Singer: Ghulam Ali
शौक से नाक़ामी की बदौलत कूचा-ए-दिल ही छूट गया
सारी उम्मीदें टूट गईं दिल बैठ गया जी छूट गया।
लीजिए क्या दामन की ख़बर और दस्त-ए-जुनूँ को क्या कहिए
अपने ही हाथ से दिल का दामन मुद्दत गुज़री छूट गया।
मंज़िल-ए-इश्क पे तनहा पहुँचे कोई तमन्ना साथ न थी
थक थक कर इस राह में आख़िर इक इक साथी छूट गया।
फ़ानी हम तो जीते-जी वो मैयत हैं बे-गोर-ओ-कफ़न
गुरबत जिसको रास न आई और वतन भी छूट गया।
–
कूचा = Lane, A narrow street
दस्त = Hands
जुनूँ = जुनून = Ecstasy, Frenzy, Insanity
फ़ानी = Mortal
मैयत = Corpse
गोर = Tomb
कफ़न = Cloth To Cover The Corpse, Shroud
गुरबत = Exile
No Comments » |
श |
Permalink
Posted by Jaya
July 22, 2005
Lyricist:
Singer: Mehdi Hasan
ज़िन्दग़ी की राह में टकरा गया कोई
इक रोशनी अँधेरे में दिखला गया कोई।
वो हादसा वो पहली मुलाक़ात क्या कहूँ,
कितनी अजब थी सूरत-ए-हालात क्या कहूँ।
वो क़हर, वो ग़ज़ब, वो जफ़ा मुझको याद है,
वो उसकी बेरुख़ी की अदा मुझको याद है।
मिटता नहीं है ज़ेहन से यूँ छा गया कोई।
पहले वो मुझको देखकर बरहम-सी हो गई,
फिर अपने ही हसीन ख़यालों में खो गई।
बेचारगी में मेरी उसे रहम आ गया,
शायद मेरे तड़पने का अंदाज़ भा गया।
साँसों से भी क़रीब मेरे आ गया कोई।
अब उस दिल-ए-तबाह की हालत ना पूछिए
बेनाम आरज़ुओं की लज़्ज़त ना पूछिए।
इक अजनबी था रूह का अरमान बन गया
इक हादसा था प्यार का उनवान बन गया।
मंज़िल का रास्ता मुझे दिखला गया कोई।
–
क़हर = Rage, Anger
जफ़ा = Oppression, Injustice
ज़ेहन = Mind
बरहम = Confused, Topsy-turvy, Angry, Vexed
लज़्ज़त = Deliciousness, Pleasurable Experience, Relish, Pleasure Enjoyment
उनवान = Legend
10 Comments |
ज |
Permalink
Posted by Jaya
July 21, 2005
Lyricist:
Singer: Mehdi Hasan
हमारी साँसों में आजतक वो हिना की ख़ुशबू महक रही है।
लबों पे नग़में मचल रहे हैं नज़र से मस्ती छलक रही है।
कभी जो थे प्यार की ज़मानत वो हाथ हैं ग़ैर की अमानत
जो कसमें खाते थे चाहतों की उन्हीं की नीयत बहक रही है।
किसी से कोई गिला नहीं है, नसीब ही में वफ़ा नहीं है
जहाँ कहीं था हिना को खिलना हिना वहीं पे महक रही है।
वो जिनकी ख़ातिर ग़ज़ल कही था वो जिनकी ख़ातिर लिखे थे नग़मे
उन्हीं के आगे सवाल बन के ग़ज़ल की झाँझर झनक रही है।
2 Comments |
Uncategorized |
Permalink
Posted by Jaya
July 21, 2005
Lyricist:
Singer: Munni Begam
बेवफ़ा से भी प्यार होता है।
यार कुछ भी हो यार होता है।
साथ में उसके है रक़ीब तो क्या
फूल के साथ खार होता है।
जब वो आते नहीं शब-ए-वादा
मौत का इंतज़ार होता है।
दोस्त से क्यों भला न खाते फ़रेब
दोस्त का ऐतबार होता है।
इश्क की कायनात में पुर नम
हुस्न परवरदिगार होता है।
–
रक़ीब = Rival
खार = Thorn
कायनात = Universe
पुर नम = Tearful
No Comments » |
Uncategorized |
Permalink
Posted by Jaya
July 21, 2005
Lyricist:
Singer: Ghulam Ali
प्रीतम प्रीत लगा के दूर देश न जा
बसो हमारी नागरी हम माँगे तू खा।
–
मैंने लाखों के बोल सहे सितमगर तेरे लिए।
वो करें भी तो किन अलफ़ाज़ में शिकवा तेरा
जिनको तेरी निगाह-ए-लुत्फ़ ने बरबाद किया ।
इसका रोना नहीं क्यों तुमने किया दिल बरबाद
इसका ग़म है कि बहुत देर में बरबाद किया।
दुआ बहार की माँगी तो इतने फूल खिले
कहीं जगह ना मिली मेरे आशियाने को।
सुना है ग़ैर की महफ़िल में तुम न जाओगे
कहो तो आज सजा लूँ गरीबखाने को।
–
नैना तुमरे प्यारे लगत हैं
मैंने क्या-क्या ज़ुल्म सहे सितमगर तेरे लिए।
तुम बिन लागे सूनी सेजरिया
तुम बिन काटे रैन गुजरिया।
मैंने क्या-क्या ज़ुल्म सहे सितमगर तेरे लिए।
1 Comment |
Uncategorized |
Permalink
Posted by Jaya