गली-गली तेरी याद बिछी है

January 23, 2008

Lyrics:
Singer: Ghulam Ali

गली-गली तेरी याद बिछी है, प्यार रस्ता देख के चल
मुझसे इतनी वहशत है तो मेरी हदों से से दूर निकल।

एक समय तेरा फूल-सा नाज़ुक हाथ था मेरे शानों पर
एक ये वक़्त कि मैं तनहा और दुख के काँटों का जंगल।

याद है अब तक तुझसे बिछड़ने की वो अँधेरी शाम मुझे
तू ख़ामोश खड़ा था लेकिन बातें करता था काजल।

मेरा मुँह क्या देख रहा है, देख उस काली रात तो देख
मैं वही तेरा हमराही हूँ, साथ मेरे चलना है तो चल।


हमके किसके ग़म ने मारा

January 23, 2008

Lyrics:
Singer: Ghulam Ali

दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया
जब चली सर्द हवा मैंने तुझे याद किया
इसका रोना नहीं क्यों तुमने किया दिल बरबाद
इसका ग़म है कि बहुत देर में बरबाद किया

हमको किसके ग़म ने मारा, ये कहानी फिर सही
किसने तोड़ा दिल हमारा, ये कहानी फिर सही।

दिल के लुटने का सबब पूछो न सबके सामने
नाम आएगा तुम्हारा, ये कहानी फिर सही।

नफ़रतों के तीर खाकर दोस्तों के शहर में
हमने किस-किस को पुकारा, ये कहानी फिर सही।

क्या बताएँ प्यार की बाज़ी वफ़ा की राह में
कौन जीता कौन हारा, ये कहानी फिर सही।


मिल मिल के बिछड़ने का मज़ा क्यों नहीं देते

October 18, 2006

Lyrics:
Singer:

मिल मिल के बिछड़ने का मज़ा क्यों नहीं देते?
हर बार कोई ज़ख़्म नया क्यों नहीं देते?

ये रात, ये तनहाई, ये सुनसान दरीचे
चुपके से मुझे आके सदा क्यों नहीं देते।

है जान से प्यारा मुझे ये दर्द-ए-मोहब्बत
कब मैंने कहा तुमसे दवा क्यों नहीं देते।

गर अपना समझते हो तो फिर दिल में जगह दो
हूँ ग़ैर तो महफ़िल से उठा क्यों नहीं देते।

Had listened to this on one of the Kingfisher flights and noted it down there only. Do not remember the singer now and do not know about the lyricist either. Any help?


हवा का ज़ोर भी

October 18, 2006

Lyrics:
Singer:

हवा का ज़ोर भी काफ़ी बहाना होता है
अगर चिराग किसी को जलाना होता है।

ज़ुबानी दाग़ बहुत लोग करते रहते हैं,
जुनूँ के काम को कर के दिखाना होता है।

हमारे शहर में ये कौन अजनबी आया
कि रोज़ _____ सफ़र पे रवाना होता है।

कि तू भी याद  नहीं आता ये तो होना था
गए दिनों को सभी को भुलाना होता है।

Had listened to this on one of the Kingfisher flights and noted it down there only. Do not remember the singer now and do not know about the lyricist either. Further could not hear a word if the third “sher” and that’s why there is a blank. Any help?


हमें कोई ग़म नहीं था ग़म-ए-आशिक़ी से पहले

August 19, 2006

Lyrics:
Singer: Mehdi Hasan

हमें कोई ग़म नहीं था ग़म-ए-आशिक़ी से पहले
न थी दुश्मनी किसी से तेरी दोस्ती से पहले।

है ये मेरी बदनसीबी तेरा क्या कुसूर इसमें
तेरे ग़म ने मार डाला मुझे ज़िन्दग़ी से पहले।

मेरा प्यार जल रहा है अरे चाँद आज छुप जा
कभी प्यार था हमें भी तेरी चाँदनी से पहले।

मैं कभी न मुसकुराता जो मुझे ये इल्म होता
कि हज़ारों ग़म मिलेंगे मुझे इक खुशी से पहले।

ये अजीब इम्तिहाँ है कि तुम्हीं को भूलना है
मिले कब थे इस तरह हम तुम्हें बेदिली से पहले।


तक़लीफ़-ए-हिज्र दे गई राहत कभी-कभी

November 20, 2005

Lyrics:
Singer: Abida Parveen

तक़लीफ़-ए-हिज्र दे गई राहत कभी-कभी
बदला है यों भी रंग-ए-मोहब्बत कभी-कभी।

दिल मे तेरी जफ़ा को सहारा समझ लिया
गुज़री है यों भी हम पे मुसीबत कभी-कभी।

दुनिया समझ न ले तेरे ग़म की नज़ाकतें
करता हूँ ज़ेर-ए-लब शिक़ायत कभी-कभी।

है जिस तरफ़ निग़ाह तवज्जो उधर नहीं
होती है बेरुख़ी भी इनायत कभी-कभी।

आई शब-ए-फिराक़ तो घबरा गए ‘शजी’
आती है ज़िन्दगी में क़यामत कभी-कभी।

Is शजी the name of the lyricist? Any idea?

ज़ेर = Defeated, Weak , Under
ज़ेर-ए-लब = Humming, In A Whisper, Undertone
तवज्जो = Attention
फिराक़   = Separation, Anxiety


तुमको देखे हुए ग़ुज़रे हैं ज़माने आओ

November 6, 2005

Lyrics:
Singer: Abida Parveen

तुमको देखे हुए ग़ुज़रे हैं ज़माने आओ
उम्र-ए-रफ़्ता का कोई ख़्वाब दिखाने आओ

मैं सराबों में भटकता रहूँ सहरा-सहरा
तुम मेरी प्यास को आईना दिखाने आओ।

अजनबयती ने कई दाग़ दिए हैं दिल को
आशनाई का कोई ज़ख़्म लगाने आओ।

मिलना चाहा तो किए तुमने बहाने क्या-क्या
अब किसी रोज़ न मिलने के बहाने आओ।

सराब = Mirage
सहरा = Desert
उम्र-ए-रफ़्ता = Past


मेरी मानो यारों मुझको

October 16, 2005

Lyrics:
Singer: Bhupinder Singh

मेरी मानो यारों मुझको आज न रोको पीने से
बेहोशी में मरना अच्छा होश में आ कर जीने से।

मैं प्यासा हूँ मुझे पिलाओ
जलते हैं जब दिल के घाव
आता हूँ मैखाने में,
जाम नहीं भरते तो आओ
कतरा कतरा ही टपकाओ
तुम मेरे पैमाने में
खाली जाम लगा रखा है मेरे अपने सीने से।

आज मेरे आँसू ना पोछो
अपने  हाल पे रो लेने दो
मुझ आवारा पागल को,
कैसे गले लगा लोगे तुम
कितनी देर सँभालोगे तुम
मय की ख़ाली बोतल को।
ठोकर मारो मुझे गिरा दो तुम अहसास के ज़ीने से।


सुरमई शाम के उजालों से

August 18, 2005

Lyrics:
Singer: Runa Laila

सुरमई शाम के उजालों से जब भी सज-धज के रात आती है
बेवफ़ा, बेरहम ओ बेदर्दी जाने क्यों तेरी याद आती है।

इस जवानी ने क्या सज़ा पाई, रेशमी सेज हाय तनहाई,
शोख़ जज़्बात ले हैं अँगड़ाई,आँखें बोझल हैं नींद हरजाई,
तेरी तस्वीर तेरी परछाईं दे के आवाज़ फिर बुलाती है।

आज भी लम्हे वो मोहब्बत के गर्म साँसों से लिपटे रहते हैं,
अब भी अरमान तेरी चाहत के महकी ज़ुल्फ़ों में सिमटे रहते हैं,
तुझको भूलें तो कैसे भूलें हम बस यही सोच अब सताती है।

वो भी क्या दिन थे जब कि हम दोनों मरने-जीने का वादा करते थे
जाम हो ज़हर का कि अमृत का साथ पीने का वादा करते थे।
ये भी क्या दिन हैं क्या क़यामत है ग़म तो ग़म है ख़ुशी भी खाती है।


वफ़ा का नाम ज़माने में आम कर जाऊँ

August 16, 2005

Lyrics:
Singer: Runa Laila

वफ़ा का नाम ज़माने में आम कर जाऊँ
फिर उसके बाद मैं ज़िंदा रहूँ कि मर जाऊँ।

इलाही मुझको अता कर सदाक़तों के चिराग़
मैं उनकी रोशनी लेकर नगर-नगर जाऊँ।

तेरी जमीं पे न हो नाम नफ़रतों का कहीं
मोहब्बतों के फ़साने सुनूँ जिधर जाऊँ।

मेरे वज़ूद ये भी तो एक मसरफ़ है
दिलों में प्यार की मानिंद मैं उतर जाऊँ।

मज़ा तो जब है कि दुश्मन भी मुझको याद करे
मिसाल प्यार की ऐसी मैं छोड़ कर जाऊँ।

अता कर = Give
सदाक़त = Truth
मसरफ़ = Outlay