दुख की लहर ने छेड़ा होगा

July 26, 2005

Lyricist: Nasir Kazmi
Singer: Ghulam Ali

दुख की लहर ने छेड़ा होगा
याद ने कंकड़ फेंका होगा।

आज तो मेरा दिल कहता है
तू इस वक़्त अकेला होगा।

मेरे चूमे हुए हाथों से
औरों के ख़त लिखता होगा।

यादों की जलती शबनम से
फूल-सा मुखड़ा धोया होगा।

मोती जैसी शकल बनाकर
आइने को तकता होगा।

मैं तो आज बहुत रोया हूँ
तू भी शायद रोया होगा।

‘नासिर’ तेरा मीत पुराना
तुझको याद तो आता होगा।


दिल में और तो क्या रखा है

July 25, 2005

Lyricist: Nasir Kazmi
Singer: Ghulam Ali

दिल में और तो क्या रखा है
तेरा दर्द छुपा रखा है।

इतने दुखों की तेज़ हवा में
दिल का दीप जला रखा है।

इस नगरी के कुछ लोगों ने
दुख का नाम दवा रखा है।

वादा-ए-यार की बात न छेड़ो
ये धोखा भी खा रखा है।

भूल भी जाओ बीती बातें
इन बातों में क्या रखा है।

चुप चुप क्यों रहते हो ‘नासिर’
ये क्या रोग लगा रखा है।


दिल धड़कने का सबब याद आया

July 14, 2005

Lyricist: Nasir Kazmi
Singer: Ghulam Ali

दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तेरी याद थी अब याद आया।

आज मुश्किल है सँभलना ऐ दोस्त
तू मुसीबत में अजब याद आया।

हाल-ए-दिल हम भी सुनाते लेकिन
जब वो रुख़सत हुए तब याद आया।

दिन गुज़ारा था बड़ी मुश्किल से
फिर तेरा वादा-ए-शब याद आया।

बैठ कर साया-ए-गुल में ‘नासिर’
हम बहुत रोये वो जब याद आया।