पत्ता-पत्ता, बूटा-बूटा हाल हमारा जाने है

November 17, 2005

Lyrics: Meer Taqi Meer
Singer: Mehdi Hasan

पत्ता-पत्ता, बूटा-बूटा हाल हमारा जाने है
जाने-ना-जाने गुल ही ना जाने, बाग तो सारा जाने है।

चारागरी बीमारी-ए-दिल की रस्म-ए-शहर-ए-हुस्न नहीं
वरना दिलबर नादाँ भी इस दर्द का चारा जाने है।

महर-ओ-वफ़ा-ओ-लुत्फ़-ओ-इनायत एक से वाक़िफ़ इनमें नहीं
और तो सब कुछ तन्ज़-ओ-किनाया रम्ज़-ओ-इशारा जाने है।

महर = Affection
चारागरी = Healing of Wounds and Pain
तन्ज़ = Jest, Laugh, Quirk, Satire, Sarcasm
किनाया = Riddle
रम्ज़ = Secret, Mysterious


देख तो दिल कि जाँ से उठता है

July 18, 2005

Lyricist: Meer Taqi Meer
Singer: Mehdi Hasan

देख तो दिल कि जाँ से उठता है
ये धुआँ-सा कहाँ से उठता है।

गोर किस दिलजले की है ये फ़लक
शोला एक सुबह याँ उठता है।

बैठने कौन दे है फिर उसको
जो तेरे आसताँ से उठता है।

यूँ उठे आह उसगली से हम
जैसे कोई जहाँ से उठता है।


गोर = Tomb, Grave
फ़लक = Sky
याँ = यहाँ
आसताँ = Abode, Threshold