September 13, 2006
Lyrics: Hasrat Jaipuri
Singer : Hussain Brothers
मुसाफ़िर हैं हम तो चले जा रहे हैं बड़ा ही सुहाना ग़ज़ल का सफ़र है।
पता पूछते हो तो इतना पता है हमारा ठिकाना गुलाबी नगर है।
ग़ज़ल ही हमारा अनोखा जहाँ है ग़ज़ल प्यार की वो हसीं दासताँ है।
इसे जो भी सुनता है, वो झूमता है वो जादू है इसमें कुछ ऐसा असर है।
ना कोई थकन है, न कोई ख़लिश है मोहब्बत की जाने ये कैसी कशिश है।
जिसे देखिए वो चला जा रहा है, जहान-ए-ग़ज़ल की सुहानी डगर है।
वली, मीर, मोमिन ने इसको निखारा जिगर, दाग़, ग़ालिब ने इसको सँवारा।
इसे मोसिक़ी ने गले से लगाया ग़ज़ल आज दुनिया के पेश-ए-नज़र है।
यही है हमारा ताल्लुक़ ग़ज़ल से हम इसके लिए ये हमारे लिए है।
ये अपनी कहानी ज़माने में ‘हसरत’ सभी को पता है, सभी को ख़बर है।
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Hasrat Jaipuri, म |
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Posted by Jaya
August 15, 2005
Lyrics: Hasrat Jaipuri
Singer: Hussain Brothers
जब प्यार नहीं है तो भुला क्यों नहीं देते?
ख़त किसलिए रखे हैं जला क्यों नहीं देते?
किस वास्ते लिखा है हथेली पे मेरा नाम
मैं हर्फ़ ग़लत हूँ तो मिटा क्यों नहीं देते?
लिल्लाह शब-ओ-रोज़ की उलझन से निकालो
तुम मेरे नहीं हो तो बता क्यों नहीं देते?
रह रह के न तड़पाओ ऐ बेदर्द मसीहा
हाथों से मुझे ज़हर पिला क्यों नहीं देते?
जब इसकी वफ़ाओं पे यकीं तुमको नहीं है
‘हसरत’ को निग़ाहों से गिरा क्यों नहीं देते?
–
हर्फ = Syllable, Letter
शब-ओ-रोज़ = Night and Day
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Hasrat Jaipuri |
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Posted by Jaya
August 13, 2005
Lyricist: Hasrat Jaipuri
Singer: Hussain Brothers
इश्क जब एक तरफ़ हो तो सज़ा देता है
और जब दोनों तरफ़ हो तो मज़ा देता है।
अपने माथे पे ये बिंदिया की चमक रहने दो
ये सितारा मुझे मंज़िल के पता देता है।
ऐ नमकपाश तेरी साँवली सूरत की क़सम
दिल का हर ज़ख़्म तुझे दिल से दुआ देता है।
तू मुझे प्यार से देखे या न देखे ज़ालिम
तेरा अंदाज़ मोहब्बत का पता देता है।
मैं किसी ज़ाम का मोहताज नहीं हूँ ‘हसरत’
मेरा साकी मुझे आँखों से पिला देता है।
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Hasrat Jaipuri |
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Posted by Jaya
August 12, 2005
Lyricist: Hasrat Jaipuri
Singer: Hussain Brothers
नूर-ए-अनवर से अँधेरे को मिटाया आपने
और क़िस्मत का सितारा जगमगाया आपने।
ख़ुशबू-ए-अफ़ज़ल ज़माना हमको कहता है मग़र
आज हम जो कुछ भी हैं हमको बनाया आपने।
–
कह रहा है आपका हर शख़्स दीवाना हमें
आप ही के नाम से दुनिया ने पहचाना हमें।
आपके दम से ही क़ायम है निज़ाम-ए-ज़िन्दग़ी
एक पल के वास्ते भी छोड़ न जाना हमें।
दोस्तों का प्यार, हसरत और फिर उसका करम
अहल-ए-फ़न अहल-ए-नज़र हर बज़्म ने जाना हमें।
–
नूर = Luminescence, Luster
अनवर = Light
अफ़ज़ल = Prime
निज़ाम = Arrangement, Establishment, Order, Organisation
अहल = One who is, Resident, Member
बज़्म = Gathering
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Hasrat Jaipuri |
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Posted by Jaya
August 11, 2005
Lyricist: Hasrat Jaipuri
Singer: Hussain Brothers
नज़र मुझसे मिलाती हो तो तुम शरमा-सी जाती हो
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।
जबाँ ख़ामोश है लेकिन निग़ाहें बात करती हैं
अदाएँ लाख भी रोको अदाएँ बात करती हैं।
नज़र नीची किए दाँतों में उँगली को दबाती हो।
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।
छुपाने से मेरी जानम कहीं क्या प्यार छुपता है
ये ऐसा मुश्क है ख़ुशबू हमेशा देता रहता है।
तुम को सब जानती हो फिर भी क्यों मुझको सताती हो?
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।
तुम्हारी प्यार का ऐसे हमें इज़हार मिलता है
हमारा नाम सुनते ही तुम्हारा रंग खिलता है
और फिर साज़-ए-दिल पे तुम हमारे गीत गाती हो।
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।
तुम्हारे घर में जब आऊँ तो छुप जाती हो परदे में
मुझे जब देख ना पाओ तो घबराती हो परदे में
ख़ुद ही चिलमन उठा कर फिर इशारों से बुलाती हो।
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।
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Hasrat Jaipuri, न |
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Posted by Jaya
August 10, 2005
Lyricist: Hasrat Jaipuri
Singer: Hussain Brothers
तू मेरे साथ न चल, ऐ मेरी रूह-ए-ग़ज़ल
लोग बदनाम न कर दें तू इरादों को बदल।
मैंने माना कि बहुत प्यार किया है तूने
साथ ही जीने का इकरार है तूने
मान ले बात मेरी देख तू इस राह न चल।
साथ देखेंगे तो फिर लोग कहेंगे क्या-क्या
सोच ले, सोच ले इलज़ाम धरेंगे क्या-क्या
ऐ मेरी परदा-नशीं देख न परदे से निकल।
अपनी उलफ़त पे कभी आँच न आ जाए कहीं
तेरी रुसवाई हो ये बात गँवारा ही नहीं।
देख नादान न बन, होश में आ, यूँ न मचल।
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Hasrat Jaipuri, त |
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Posted by Jaya