November 19, 2005
Lyrics: Saleem Gilani
Singer: Mehdi Hasan
फूल ही फूल खिल उठे मेरे पैमाने में
आप क्या आए बहार आ गई मैख़ाने में।
आप कुछ यूँ मेरे आइना-ए-दिल में आए
जिस तरह चाँद उतर आया हो पैमाने में
आप के नाम से ताबिंदा है उनवान-ए-हयात
वर्ना कुछ बात नहीं थी मेरे अफ़साने में।
–
ताबिंदा = Bright, Illuminated
उनवान = Title
हयात = Life, Existence
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November 18, 2005
Lyrics: Wafa Roomani
Singer: Mehdi Hasan
सता-सता के हमें अश्कबार करती है
तुम्हारी याद बहुत बेक़रार करती है।
वो दिन जो साथ गुज़ारे थे प्यार में हमने
तलाश उनको नज़र बार-बार करती है।
ग़िला नहीं जो नसीबों ने कर दिया है जुदा
तेरी जुदाई भी अब हमको प्यार करती है।
कनारे बैठ के जिसके किए थे कौल-ओ-क़रार
नदी वो अब भी तेरा इंतज़ार करती है।
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November 17, 2005
Lyrics: Tasleem Faazli
Singer: Mehdi Hasan
ख़ुदा करे कि मोहब्बत में ये मक़ाम आए
किसी का नाम लूँ लब पे तुम्हारा नाम आए।
कुछ इस तरह से जिए ज़िन्दग़ी बसर न हुई
तुम्हारे बाद किसी रात की सहर न हुई
सहर नज़र से मिले ज़ुल्फ़ ले के शाम आए।
ख़ुद अपने घर में वो मेहमान बन के आए हैं
सितम तो देखिए अनजान बन के आए हैं
हमारे दिल की तड़प आज कुछ तो काम आए।
वही है साज़ वही गीत है वही मंज़र
हर एक चीज़ वही है नहीं है तुम वो मगर
उसी तरह से निग़ाहें उठें, सलाम आए।
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Tasleem Fazli, ख |
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November 17, 2005
Lyrics: Meer Taqi Meer
Singer: Mehdi Hasan
पत्ता-पत्ता, बूटा-बूटा हाल हमारा जाने है
जाने-ना-जाने गुल ही ना जाने, बाग तो सारा जाने है।
चारागरी बीमारी-ए-दिल की रस्म-ए-शहर-ए-हुस्न नहीं
वरना दिलबर नादाँ भी इस दर्द का चारा जाने है।
महर-ओ-वफ़ा-ओ-लुत्फ़-ओ-इनायत एक से वाक़िफ़ इनमें नहीं
और तो सब कुछ तन्ज़-ओ-किनाया रम्ज़-ओ-इशारा जाने है।
महर = Affection
चारागरी = Healing of Wounds and Pain
तन्ज़ = Jest, Laugh, Quirk, Satire, Sarcasm
किनाया = Riddle
रम्ज़ = Secret, Mysterious
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November 6, 2005
Lyrics: Faiz Ahmed Faiz
Singer: Mehdi Hasan
आए कुछ अब्र कुछ शराब आए
उसके बाद आए जो अज़ाब आए।
बाम-ए-मीना से माहताब तेरे
दस्त-ए-साकी में आफ़ताब आए।
कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब
आज तुम याद बेहिसाब आए।
हर रग-ए-ख़ूँ में फिर चरागाँ हो
सामने फिर वो फिर बेनक़ाब आए।
‘फ़ैज़’ थी राह सर-बसर मंज़िल
हम जहाँ पहुँचे क़ामयाब आए।
–
अब्र = Cloud
अज़ाब = Agony, Anguish, Pain, Punishment
बाम = Terrace, Rooftop
मीना = Enamel
दस्त = Hands
सर-बसर = Wholly, Entirely
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Faiz Ahmed Faiz, आ |
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November 6, 2005
Lyrics:
Singer: Abida Parveen
तुमको देखे हुए ग़ुज़रे हैं ज़माने आओ
उम्र-ए-रफ़्ता का कोई ख़्वाब दिखाने आओ
मैं सराबों में भटकता रहूँ सहरा-सहरा
तुम मेरी प्यास को आईना दिखाने आओ।
अजनबयती ने कई दाग़ दिए हैं दिल को
आशनाई का कोई ज़ख़्म लगाने आओ।
मिलना चाहा तो किए तुमने बहाने क्या-क्या
अब किसी रोज़ न मिलने के बहाने आओ।
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सराब = Mirage
सहरा = Desert
उम्र-ए-रफ़्ता = Past
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October 25, 2005
Lyrics: Asghar Saleem
Singer: Mehdi Hasan
गुलशन-गुलशन शोला-ए-ग़ुल की ज़ुल्फ़-ए-सबा की बात चली
हर्फ़-ए-जुनूँ की बंद-गिराँ की ज़ुल्म-ओ-सज़ा की बात चली।
ज़िंदा-ज़िंदा शोर-ए-जुनूँ है मौसम-ए-गुल के आने से
महफ़िल-महफ़िल अबके बरस अरबाब-ए-वफ़ा की बात चली।
अहद-ए-सितम है देखें हम आशुफ़्ता-सरों पर क्या गुजरे
शहर में उसके बंद-ए-क़बा के रंग-ए-हिना की बात चली।
एक हुआ दीवाना एक ने सर तेशे से फोड़ लिया
कैसे-कैसे लोग थे जिनसे रस्म-ए-वफ़ा की बात चली।
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सबा=Breeze, wind
हर्फ़-ए-जुनूँ = A word that describes craziness
अरबाब = Friends
अहद-ए-सितम = Days of Tyranny/Cruelty
आशुफ़्ता = Perplexed, Careworn, Distracted, Confused
आशुफ़्ता-सर = Mentally Deranged
क़बा = Gown, Long Coat Like Garment (I think it has been used in the sense of बुर्का here)
बंद-ए-क़बा = Locked in the gown/बुर्का
तेशे = Axe
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Asghar Saleem, ग |
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August 18, 2005
Lyrics:
Singer: Runa Laila
सुरमई शाम के उजालों से जब भी सज-धज के रात आती है
बेवफ़ा, बेरहम ओ बेदर्दी जाने क्यों तेरी याद आती है।
इस जवानी ने क्या सज़ा पाई, रेशमी सेज हाय तनहाई,
शोख़ जज़्बात ले हैं अँगड़ाई,आँखें बोझल हैं नींद हरजाई,
तेरी तस्वीर तेरी परछाईं दे के आवाज़ फिर बुलाती है।
आज भी लम्हे वो मोहब्बत के गर्म साँसों से लिपटे रहते हैं,
अब भी अरमान तेरी चाहत के महकी ज़ुल्फ़ों में सिमटे रहते हैं,
तुझको भूलें तो कैसे भूलें हम बस यही सोच अब सताती है।
वो भी क्या दिन थे जब कि हम दोनों मरने-जीने का वादा करते थे
जाम हो ज़हर का कि अमृत का साथ पीने का वादा करते थे।
ये भी क्या दिन हैं क्या क़यामत है ग़म तो ग़म है ख़ुशी भी खाती है।
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August 17, 2005
Lyrics: Sudarshan Faakir
Singer: Jagjeet Singh
चराग़-ओ-आफ़ताब ग़ुम बड़ी हसीन रात थी
शबाब की नक़ाब गुम बड़ी हसीन रात थी।
मुझे पिला रहे थे वो कि ख़ुद ही शमाँ बुझ गई
गिलास ग़ुम,शराब ग़ुम बड़ी हसीन रात थी।
लिखा था जिस किताब कि इश्क़ तो हराम है
हुई वही किताब ग़ुम बड़ी हसीन रात थी।
लबों से लब जो मिल गए,लबों से लब ही सिल गए
सवाल ग़ुम जवाब ग़ुम बड़ी हसींन रीत थी।
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Sudarshan Faakir, च |
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August 11, 2005
Lyricist: Hasrat Jaipuri
Singer: Hussain Brothers
नज़र मुझसे मिलाती हो तो तुम शरमा-सी जाती हो
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।
जबाँ ख़ामोश है लेकिन निग़ाहें बात करती हैं
अदाएँ लाख भी रोको अदाएँ बात करती हैं।
नज़र नीची किए दाँतों में उँगली को दबाती हो।
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।
छुपाने से मेरी जानम कहीं क्या प्यार छुपता है
ये ऐसा मुश्क है ख़ुशबू हमेशा देता रहता है।
तुम को सब जानती हो फिर भी क्यों मुझको सताती हो?
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।
तुम्हारी प्यार का ऐसे हमें इज़हार मिलता है
हमारा नाम सुनते ही तुम्हारा रंग खिलता है
और फिर साज़-ए-दिल पे तुम हमारे गीत गाती हो।
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।
तुम्हारे घर में जब आऊँ तो छुप जाती हो परदे में
मुझे जब देख ना पाओ तो घबराती हो परदे में
ख़ुद ही चिलमन उठा कर फिर इशारों से बुलाती हो।
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।
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Hasrat Jaipuri, न |
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Posted by Jaya