मिल मिल के बिछड़ने का मज़ा क्यों नहीं देते

October 18, 2006

Lyrics:
Singer:

मिल मिल के बिछड़ने का मज़ा क्यों नहीं देते?
हर बार कोई ज़ख़्म नया क्यों नहीं देते?

ये रात, ये तनहाई, ये सुनसान दरीचे
चुपके से मुझे आके सदा क्यों नहीं देते।

है जान से प्यारा मुझे ये दर्द-ए-मोहब्बत
कब मैंने कहा तुमसे दवा क्यों नहीं देते।

गर अपना समझते हो तो फिर दिल में जगह दो
हूँ ग़ैर तो महफ़िल से उठा क्यों नहीं देते।

Had listened to this on one of the Kingfisher flights and noted it down there only. Do not remember the singer now and do not know about the lyricist either. Any help?


मुसाफ़िर हैं हम तो

September 13, 2006

Lyrics: Hasrat Jaipuri
Singer : Hussain Brothers
मुसाफ़िर हैं हम तो चले जा रहे हैं बड़ा ही सुहाना ग़ज़ल का सफ़र है।
पता पूछते हो तो इतना पता है हमारा ठिकाना गुलाबी नगर है।

ग़ज़ल ही हमारा अनोखा जहाँ है ग़ज़ल प्यार की वो हसीं दासताँ है।
इसे जो भी सुनता है, वो झूमता है वो जादू है इसमें कुछ ऐसा असर है।

ना कोई थकन है, न कोई ख़लिश है मोहब्बत की जाने ये कैसी कशिश है।
जिसे देखिए वो चला जा रहा है, जहान-ए-ग़ज़ल की सुहानी डगर है।

वली, मीर, मोमिन ने इसको निखारा जिगर, दाग़, ग़ालिब ने इसको सँवारा।
इसे मोसिक़ी ने गले से लगाया ग़ज़ल आज दुनिया के पेश-ए-नज़र है।

यही है हमारा ताल्लुक़ ग़ज़ल से हम इसके लिए ये हमारे लिए है।
ये अपनी कहानी ज़माने में ‘हसरत’ सभी को पता है, सभी को ख़बर है।


मेरा जो हाल हो सो हो

August 4, 2005

Lyricist: Jigar Muradabadi
Singer: Ghulam Ali

मेरा जो हाल हो सो हो बर्क़-ए-नज़र गिराए जा
मैं यों ही नालाँकश रहूँ तू यों ही मुसकुराए जा।

दिल के हर-एक गोशा में आग-सी इक लगाए जा
मुतरब-ए-आतिशी नवा हाँ इसी धुन में गाए जा।

जितनी भी आज पी सकूँ उज़्र न कर पिलाए जा
मस्त नज़र का वास्ता मस्त-नजर बनाए जा।

लुत्फ़ से हो कि कहर से होगा कभी तो रू-ब-रू
उसका जहाँ पता चले शोर वहीं मचाए जा।

इश्क को मुतमा-इन न रख हुस्न के एतमाद पे
वो तुझे आज़मा चुका तू उसे आज़माए जा।

बर्क़ = Lightning
नालाँकश = One who is Lamenting
गोशा = Angle, Cell, Corner, Lobe, Privacy
मुतरब = मुतरिब = Singer
आतिशी = Of fire, Passionate
नवा = Sound
उज़्र = Excuse, Objection
मुतमा-इन = Satisfied, Content
एतमाद = ऐतमाद = Faith, Confidence