फूल ही फूल खिल उठे मेरे पैमाने में

November 19, 2005

Lyrics: Saleem Gilani
Singer: Mehdi Hasan

फूल ही फूल खिल उठे मेरे पैमाने में
आप क्या आए बहार आ गई मैख़ाने में।

आप कुछ यूँ मेरे आइना-ए-दिल में आए
जिस तरह चाँद उतर आया हो पैमाने में

आप के नाम से ताबिंदा है उनवान-ए-हयात
वर्ना कुछ बात नहीं थी मेरे अफ़साने में।

ताबिंदा = Bright, Illuminated
उनवान = Title
हयात = Life, Existence


फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था

July 17, 2005

Lyricist: Adeem Hashmi
Singer: Ghulam Ali

फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था
सामने बैठा था मेरे और वो मेरा न था।

वो कि ख़ुशबू की तरह फैला था मेरे चार सू
मैं उसे महसूस कर सकता था छू सकता न था।

रात भर पिछली ही आहट कान में आती रही
झाँक कर देखा गली में कोई भी आया न था।

ख़ुद चढ़ा रखे थे तन पर अजनबीयत के गिलाफ़
वर्ना कब एक दूसरे को हमने पहचाना न था।

याद कर के और भी तकलीफ़ होती थी’अदीम’
भूल जाने के सिवा अब कोई भी चारा न था।

चार सू = In four directions, In all directions
गिलाफ़ = Cover, Envelope


इक बार चले आओ

July 8, 2005

Lyricist:
Singer: Mehdi Hasan

फिर आ के चले जाना,फिर आ के चले जाना
इक बार चले आओ, सूरत तो दिखा जाओ।

तुमको मेरे गीतों का संगीत बुलाता है
कुछ गीत मेरे सुन लो, कुछ अपनी सुना जाओ।

जो तुमको बुलाएँ फिर तुम शौक से मत आना
किस बात पे रूठे इतना तो बता जाओ।

क्या दिल के तड़पने का अहसास नहीं तुमको
अब जान पर बन आई, लील्लाह चले आओ।