दर्द-ओ-ग़म का ना रहा नाम तेरे आने से

January 24, 2008

Lyrics: Jurat
Singer: Ghulam Ali

दर्द-ओ-ग़म का ना रहा नाम तेरे आने से
दिल को क्या आ गया आराम तेरे आने से।

शुक्र-सद-शुक्र के लबरेज़ हुआ ऐ साकी
मय-ए-इशरत से मेरा जाम तेरे आने से।

सहर-ए-ईद ख़जिल जिससे हो ऐ माह-ए-लका
वस्ल की फूली है ये शाम तेरे आने से।

-

Don’t know what लबरेज़ and लका mean. Also am not sure if ख़जिल means shamed. Any help?

-

शुक्र = Thanks
सद = Hundred
इशरत = Delight, Enjoyment
मय-ए-इशरत = Wine of Delight
ख़जिल = Shamed (??)
माह = Moon
वस्ल = Union


दो जवाँ दिलों का ग़म दूरियाँ समझती हैं

June 26, 2005

Lyricist: Danish Aligarhi
Singer: Hussain Brothers

दो जवाँ दिलों का ग़म दूरियाँ समझती हैं
कौन याद करता है हिचकियाँ समझती हैं।

तुम तो ख़ुद ही क़ातिल हो, तुम ये बात क्या जानो
क्यों हुआ मैं दीवाना बेड़ियाँ समझती हैं।

बाम से उतरती है जब हसीन दोशीज़ा
जिस्म की नज़ाक़त को सीढ़ियाँ समझती हैं।

यूँ तो सैर-ए-गुलशन को कितना लोग आते हैं
फूल कौन तोड़ेगा डालियाँ समझती हैं।

जिसने कर लिया दिल में पहली बार घर ‘दानिश’
उसको मेरी आँखों की पुतलियाँ समझती हैं।


बाम = Terrace, Rooftop
दोशीज़ा = Bride


दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई

June 26, 2005

Lyricist: Gulzaar
Singer: Jagjeet Singh

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे अहसान उतारता है कोई।

आईना दिख के तसल्ली हुई
हमको इस घर में जानता है कोई।

फक गया है सज़र पे फल शायद
फिर से पत्थर उछालता है कोई।

फिर नज़र में लहू के छींटे हैं
तुमको शायद मुग़ालता है कोई।

देर से गूँजते हैं सन्नाटे
जैसे हमको पुकारता है कोई।


मुग़ालता = Illusions
सज़र = Branch