April 29, 2006
Lyrics: Akhtar
Singer: Jagjit Singh, Lata Mangeshkar
जो भी बुरा भला है अल्लाह जानता है,
बंदे के दिल में क्या है अल्लाह जानता है।
ये फर्श-ओ-अर्श क्या है अल्लाह जानता है,
पर्दों में क्या छिपा है अल्लाह जानता है।
जाकर जहाँ से कोई वापस नहीं है आता,
वो कौन सी जगह है अल्लाह जानता है
नेक़ी-बदी को अपने कितना ही तू छिपाए,
अल्लाह को पता है अल्लाह जानता है।
ये धूप-छाँव देखो ये सुबह-शाम देखो
सब क्यों ये हो रहा है अल्लाह जानता है।
क़िस्मत के नाम को तो सब जानते हैं लेकिन
क़िस्मत में क्या लिखा है अल्लाह जानता है।
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अर्श = Roof
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Akhtar, ज |
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Posted by Jaya
August 9, 2005
Lyricist:
Singer: Mehdi Hasan
जो ग़म-ए-हबीब से दूर थे वो ख़ुद अपनी आग में जल गए
जो ग़म-ए-हबीब को पा गए वो ग़मों से हँस के निकल गए।
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जो थके थके से थे हौसले वो शबाब बन के मचल गए
जो नज़र नज़र से गले मिली तो बुझे चिराग भी जल गए।
ये शिक़स्त-ए-दीद की करवटें भी बड़ी लतीफ़-ओ-ज़मील
मैं नज़र झुका के तड़प गया वो नज़र बचा के निकल गए।
न ख़िज़ाँ में है कोई तीरगी न बहार में है कोई रोशनी
ये नज़र-नज़र के चिराग हैं कहीं बुझ गए कहीं जल गए।
जो सँभल-सँभल के बहक गए वो फ़रेब ख़ुर्द-ए-राह थे
वो मक़ाम इश्क को पा गए जो बहक बहक के सँभल गए।
जो खिले हुए हैं रविश-रविश वो हज़ार हुस्न-ए-चमन सही
मग़र उन गुलों का जवाब क्या जो क़दम-क़दम पे कुचल गए।
न है शायर अब ग़म-ए-नौ-ब-नौ न वो दाग़-ए-दिल न वो आरज़ू
जिन्हें एतमाद-ए-बहार था वो ही फूल रंग बदल गए।
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हबीब = Beloved, Sweetheart
शिक़स्त = Breach, Breakage, Defeat
दीद = Sight
लतीफ़ = Juicy, Pleasant
ज़मील = Bonny, Attractive, Appealing
ख़िज़ाँ = Autumn, Decay
तीरगी = Darkness
ख़ुर्द = Little
रविश = The narrow pathways of the garden
नौ-ब-नौ = New, Fresh, Raw
एतमाद = Faith
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ज |
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Posted by Jaya
July 22, 2005
Lyricist:
Singer: Mehdi Hasan
ज़िन्दग़ी की राह में टकरा गया कोई
इक रोशनी अँधेरे में दिखला गया कोई।
वो हादसा वो पहली मुलाक़ात क्या कहूँ,
कितनी अजब थी सूरत-ए-हालात क्या कहूँ।
वो क़हर, वो ग़ज़ब, वो जफ़ा मुझको याद है,
वो उसकी बेरुख़ी की अदा मुझको याद है।
मिटता नहीं है ज़ेहन से यूँ छा गया कोई।
पहले वो मुझको देखकर बरहम-सी हो गई,
फिर अपने ही हसीन ख़यालों में खो गई।
बेचारगी में मेरी उसे रहम आ गया,
शायद मेरे तड़पने का अंदाज़ भा गया।
साँसों से भी क़रीब मेरे आ गया कोई।
अब उस दिल-ए-तबाह की हालत ना पूछिए
बेनाम आरज़ुओं की लज़्ज़त ना पूछिए।
इक अजनबी था रूह का अरमान बन गया
इक हादसा था प्यार का उनवान बन गया।
मंज़िल का रास्ता मुझे दिखला गया कोई।
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क़हर = Rage, Anger
जफ़ा = Oppression, Injustice
ज़ेहन = Mind
बरहम = Confused, Topsy-turvy, Angry, Vexed
लज़्ज़त = Deliciousness, Pleasurable Experience, Relish, Pleasure Enjoyment
उनवान = Legend
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ज |
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Posted by Jaya