November 6, 2005
Lyrics: Faiz Ahmed Faiz
Singer: Mehdi Hasan
आए कुछ अब्र कुछ शराब आए
उसके बाद आए जो अज़ाब आए।
बाम-ए-मीना से माहताब तेरे
दस्त-ए-साकी में आफ़ताब आए।
कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब
आज तुम याद बेहिसाब आए।
हर रग-ए-ख़ूँ में फिर चरागाँ हो
सामने फिर वो फिर बेनक़ाब आए।
‘फ़ैज़’ थी राह सर-बसर मंज़िल
हम जहाँ पहुँचे क़ामयाब आए।
–
अब्र = Cloud
अज़ाब = Agony, Anguish, Pain, Punishment
बाम = Terrace, Rooftop
मीना = Enamel
दस्त = Hands
सर-बसर = Wholly, Entirely
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July 4, 2005
Lyricist: Saba Sikri
Singer: Jagjit Singh
आज फिर उनका सामना होगा
क्या पता उसके बाद क्या होगा।
आसमान रो रहा है दो दिन से
आपने कुछ कहा-सुना होगा।
दो क़दम पर सही तेरा कूचा
ये भी सदियों का फ़सला होगा।
घर जलाता है रोशनी के लिए
कोई मुझ सा भी दिलजला होगा।
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Posted by Jaya
July 3, 2005
Lyricist: Aziz Qaisi
Singer: Jagjit Singh
आपको देख कर देखता रह गया
क्या कहूँ और कहने को क्या रह गया।
उनकी आँखों से कैसे छलकने लगा
मेरे होठों पे जो माजरा रह गया।
ऐसे बिछड़े सभी रात के मोड़ पर
आखिरी हमसफ़र रास्ता रह गया।
सोच कर आओ कू-ए-तमन्ना है ये
जानेमन जो यहाँ रह गया रह गया।
–
कू = Lane, Street
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June 28, 2005
Lyricist: Mirza Ghalib
Singer: Jagjeet Singh
आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक
कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक।
आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब
दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होने तक।
हम ने माना कि तग़ाफुल न करोगे लेकिन
ख़ाक हो जाएँगे हम तुमको ख़बर होने तक।
ग़म-ए-हस्ती का ‘असद’ किस से हो जुज़ मर्ग इलाज
शमा हर रंग में जलती है सहर होने तक।
–
सब्र-तलब = Desiring/Needing Patience
तग़ाफुल = Ignore/Neglect
जुज़ = Except/Other than
मर्ग = Death
शमा = Lamp/Candle
सहर = Dawn/Morning
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June 23, 2005
Lyricist: Sant Darshan Singh
Singer: Ghulam Ali
आज दिल से दुआ करे कोई
हक़-ए-उलफ़त अदा करे कोई।
जिस तरह दिल मेरा तड़पता है
यूँ न तड़पे ख़ुदा करे कोई।
जान-ओ-दिल हमने कर दिए कुरबान
वो न माने तो क्या करे कोई।
मस्त नज़रों से ख़ुद मेरा साकी
फिर पिलाए पिया करे कोई।
शौक-ए-दीदार दिल में है ‘दर्शन’
आ भी जाए ख़ुदा करे कोई।
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