अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं
Lyrics: Nida Fazli
Singer: Jagjit Singh
अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं,
रुख हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं।
पहले हर चीज़ थी अपनी मगर अब लगता है,
अपने ही घर में किसी दूसरे घर के हम हैं।
वक़्त के साथ है मिट्टी का सफ़र सदियों से
किसको मालूम कहाँ के हैं, किधर के हम हैं।
चलते रहते हैं कि चलना है मुसाफ़िर का नसीब
सोचते रहते हैं किस राहग़ुज़र के हम हैं।
July 10, 2007 at 8:26 am
Respact Sir
Aap ki gajal bahut hi achchhi hai
so very nice
July 15, 2007 at 3:42 pm
appki jo gazla hai wo alma-kuddus mai rakhna ka place hai
mai pase kuch sikhna chata hu plz contact kara muja mera emaid id par