अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं

Lyrics: Nida Fazli
Singer: Jagjit Singh

अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं,
रुख हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं।

पहले हर चीज़ थी अपनी मगर अब लगता है,
अपने ही घर में किसी दूसरे घर के हम हैं।

वक़्त के साथ है मिट्टी का सफ़र सदियों से
किसको मालूम कहाँ के हैं, किधर के हम हैं।

चलते रहते हैं कि चलना है मुसाफ़िर का नसीब
सोचते रहते हैं किस राहग़ुज़र के हम हैं।

2 Responses to “अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं”

  1. basant Says:

    Respact Sir

    Aap ki gajal bahut hi achchhi hai

    so very nice

  2. Mahesh "Jamshedpuri" Says:

    appki jo gazla hai wo alma-kuddus mai rakhna ka place hai
    mai pase kuch sikhna chata hu plz contact kara muja mera emaid id par

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