हमें कोई ग़म नहीं था ग़म-ए-आशिक़ी से पहले

Lyrics:
Singer: Mehdi Hasan

हमें कोई ग़म नहीं था ग़म-ए-आशिक़ी से पहले
न थी दुश्मनी किसी से तेरी दोस्ती से पहले।

है ये मेरी बदनसीबी तेरा क्या कुसूर इसमें
तेरे ग़म ने मार डाला मुझे ज़िन्दग़ी से पहले।

मेरा प्यार जल रहा है अरे चाँद आज छुप जा
कभी प्यार था हमें भी तेरी चाँदनी से पहले।

मैं कभी न मुसकुराता जो मुझे ये इल्म होता
कि हज़ारों ग़म मिलेंगे मुझे इक खुशी से पहले।

ये अजीब इम्तिहाँ है कि तुम्हीं को भूलना है
मिले कब थे इस तरह हम तुम्हें बेदिली से पहले।

2 Responses to “हमें कोई ग़म नहीं था ग़म-ए-आशिक़ी से पहले”

  1. Sagar Says:

    this is very good gazal by Mehdi hasan Sahab
    Thannks (allah aapko der sari kushiya day}

  2. Satish shahil Says:

    I like this ghazal because ………………….

    thanks hasan sahab

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