November 22, 2005
Lyrics: Mirza Ghalib
Singer: Chitra Singh
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते यही इंतज़ार होता।
तेरे वादे पर जिए हम तो ये जान झूठ जाना
कि खुशी से मर न जाते ग़र ऐतबार होता।
ये कहाँ की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेह
कोई चारासाज होता कोई ग़म-गुसार होता
कहूँ किससे मैं कि क्या है शब-ए-ग़म बुरी बला है
मुझे क्या बुरा था मरना अगर एक बार होता।
कोई मेरे दिल से पूछे तेरे तीर-ए-नीमकश को
ये ख़लिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता।
–
विसाल = Union
नासेह = Councellor
चारासाज = Healer
ग़म-गुसार = Sympathizer
8 Comments |
Mirza Ghalib |
Permalink
Posted by Jaya
November 20, 2005
Lyrics:
Singer: Abida Parveen
तक़लीफ़-ए-हिज्र दे गई राहत कभी-कभी
बदला है यों भी रंग-ए-मोहब्बत कभी-कभी।
दिल मे तेरी जफ़ा को सहारा समझ लिया
गुज़री है यों भी हम पे मुसीबत कभी-कभी।
दुनिया समझ न ले तेरे ग़म की नज़ाकतें
करता हूँ ज़ेर-ए-लब शिक़ायत कभी-कभी।
है जिस तरफ़ निग़ाह तवज्जो उधर नहीं
होती है बेरुख़ी भी इनायत कभी-कभी।
आई शब-ए-फिराक़ तो घबरा गए ‘शजी’
आती है ज़िन्दगी में क़यामत कभी-कभी।
–
Is शजी the name of the lyricist? Any idea?
–
ज़ेर = Defeated, Weak , Under
ज़ेर-ए-लब = Humming, In A Whisper, Undertone
तवज्जो = Attention
फिराक़ = Separation, Anxiety
6 Comments |
त |
Permalink
Posted by Jaya
November 20, 2005
Lyrics: Dr. Rahi Masoon Raza
Singer: Abida Parveen
हम तो हैं परदेश में देश में निकला होगा चाँद
अपनी रात की छत पे कितना तनहा होगा चाँद।
चाँद बिना हर शब यों बीती जैसे युग बीते
मेरे बिना किस हाल में होगा कैसा होगा चाँद।
–
आ पिया मोरे नैनन में मैं पलक ढाँप तोहे लूँ
ना मैं देखूँ और को, ना तोहे देखन दूँ।
–
रात ने ऐसा पेंच लगाया टूटी हाथ से डोर
आँगन वाले नीम में जाकर अटका होगा चाँद।
3 Comments |
Rahi Masoom Raza |
Permalink
Posted by Jaya
November 19, 2005
Lyrics: Masroor Anwar
Singer: Mehdi Hasan
मुझे तुम नज़र से गिरा तो रहे हो
मुझे तुम कभी भी भुला न सकोगे।
न जाने मुझे क्यों यक़ीं हो चला है
मेरे प्यार को तुम मिटा न सकोगे।
मेरी याद होगी जिधर जाओगे तुम
कभी नग़मा बन के, कभी बन के आँसू।
तड़पता मुझे हर तरफ पाओगे तुम।
शमा जो जलाई है मेरी वफ़ा ने
बुझाना भी चाहो बुझा न सकोगे।
कभी नाम बातों में आया जो मेरा
तो बेचैन हो-हो के दिल थाम लोगे।
निग़ाहों में छाएगा ग़म का अँधेरा।
किसी ने जो पूछा सबब आँसुओं का
बताना भी चाहो बता न सकोगे।
6 Comments |
Masroor Anwar |
Permalink
Posted by Jaya
November 19, 2005
Lyrics: Saleem Gilani
Singer: Mehdi Hasan
फूल ही फूल खिल उठे मेरे पैमाने में
आप क्या आए बहार आ गई मैख़ाने में।
आप कुछ यूँ मेरे आइना-ए-दिल में आए
जिस तरह चाँद उतर आया हो पैमाने में
आप के नाम से ताबिंदा है उनवान-ए-हयात
वर्ना कुछ बात नहीं थी मेरे अफ़साने में।
–
ताबिंदा = Bright, Illuminated
उनवान = Title
हयात = Life, Existence
No Comments » |
Saleem Gilani, फ |
Permalink
Posted by Jaya
November 18, 2005
Lyrics: Wafa Roomani
Singer: Mehdi Hasan
सता-सता के हमें अश्कबार करती है
तुम्हारी याद बहुत बेक़रार करती है।
वो दिन जो साथ गुज़ारे थे प्यार में हमने
तलाश उनको नज़र बार-बार करती है।
ग़िला नहीं जो नसीबों ने कर दिया है जुदा
तेरी जुदाई भी अब हमको प्यार करती है।
कनारे बैठ के जिसके किए थे कौल-ओ-क़रार
नदी वो अब भी तेरा इंतज़ार करती है।
3 Comments |
Wafa Roomani, स |
Permalink
Posted by Jaya
November 17, 2005
Lyrics: Tasleem Faazli
Singer: Mehdi Hasan
ख़ुदा करे कि मोहब्बत में ये मक़ाम आए
किसी का नाम लूँ लब पे तुम्हारा नाम आए।
कुछ इस तरह से जिए ज़िन्दग़ी बसर न हुई
तुम्हारे बाद किसी रात की सहर न हुई
सहर नज़र से मिले ज़ुल्फ़ ले के शाम आए।
ख़ुद अपने घर में वो मेहमान बन के आए हैं
सितम तो देखिए अनजान बन के आए हैं
हमारे दिल की तड़प आज कुछ तो काम आए।
वही है साज़ वही गीत है वही मंज़र
हर एक चीज़ वही है नहीं है तुम वो मगर
उसी तरह से निग़ाहें उठें, सलाम आए।
6 Comments |
Tasleem Fazli, ख |
Permalink
Posted by Jaya
November 17, 2005
Lyrics: Meer Taqi Meer
Singer: Mehdi Hasan
पत्ता-पत्ता, बूटा-बूटा हाल हमारा जाने है
जाने-ना-जाने गुल ही ना जाने, बाग तो सारा जाने है।
चारागरी बीमारी-ए-दिल की रस्म-ए-शहर-ए-हुस्न नहीं
वरना दिलबर नादाँ भी इस दर्द का चारा जाने है।
महर-ओ-वफ़ा-ओ-लुत्फ़-ओ-इनायत एक से वाक़िफ़ इनमें नहीं
और तो सब कुछ तन्ज़-ओ-किनाया रम्ज़-ओ-इशारा जाने है।
महर = Affection
चारागरी = Healing of Wounds and Pain
तन्ज़ = Jest, Laugh, Quirk, Satire, Sarcasm
किनाया = Riddle
रम्ज़ = Secret, Mysterious
11 Comments |
Meer Taqi Meer, प |
Permalink
Posted by Jaya
November 6, 2005
Lyrics: Ibn-e-Insha
Singer: Abida Parveen
कल चौदहवीं की रात थी,
शब भर रहा चर्चा तेरा।
कुछ ने कहा ये चाँद है,
कुछ ने कहा चेहरा तेरा।
हम भी वहीं मौज़ूद थे,
हमसे भी सब पूछा किए।
हम हँस दिए हम चुप रहे
मंज़ूर था पर्दा तेरा।
इस शहर में किससे मिलें
हमसे तो छूटी महफ़िलें।
हर शख़्स तेरा नाम ले
हर शख़्स दीवाना तेरा।
कूचे को तेरे छोड़ कर
जोगी ही बन जाएँ मग़र,
जंगल तेरे, पर्वत तेरे
बस्ती तेरी, सहरा तेरा।
बेदर्द सुननी हो तो चल
कहता है क्या अच्छी गज़ल
आशिक तेरा, रुसवा तेरा
शायर तेरा ‘इंशा’ तेरा।
6 Comments |
Ibn-E-Insha |
Permalink
Posted by Jaya
November 6, 2005
Lyrics: Faiz Ahmed Faiz
Singer: Mehdi Hasan
आए कुछ अब्र कुछ शराब आए
उसके बाद आए जो अज़ाब आए।
बाम-ए-मीना से माहताब तेरे
दस्त-ए-साकी में आफ़ताब आए।
कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब
आज तुम याद बेहिसाब आए।
हर रग-ए-ख़ूँ में फिर चरागाँ हो
सामने फिर वो फिर बेनक़ाब आए।
‘फ़ैज़’ थी राह सर-बसर मंज़िल
हम जहाँ पहुँचे क़ामयाब आए।
–
अब्र = Cloud
अज़ाब = Agony, Anguish, Pain, Punishment
बाम = Terrace, Rooftop
मीना = Enamel
दस्त = Hands
सर-बसर = Wholly, Entirely
5 Comments |
Faiz Ahmed Faiz, आ |
Permalink
Posted by Jaya