August 9, 2005
Lyricist:
Singer: Mehdi Hasan
जो ग़म-ए-हबीब से दूर थे वो ख़ुद अपनी आग में जल गए
जो ग़म-ए-हबीब को पा गए वो ग़मों से हँस के निकल गए।
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जो थके थके से थे हौसले वो शबाब बन के मचल गए
जो नज़र नज़र से गले मिली तो बुझे चिराग भी जल गए।
ये शिक़स्त-ए-दीद की करवटें भी बड़ी लतीफ़-ओ-ज़मील
मैं नज़र झुका के तड़प गया वो नज़र बचा के निकल गए।
न ख़िज़ाँ में है कोई तीरगी न बहार में है कोई रोशनी
ये नज़र-नज़र के चिराग हैं कहीं बुझ गए कहीं जल गए।
जो सँभल-सँभल के बहक गए वो फ़रेब ख़ुर्द-ए-राह थे
वो मक़ाम इश्क को पा गए जो बहक बहक के सँभल गए।
जो खिले हुए हैं रविश-रविश वो हज़ार हुस्न-ए-चमन सही
मग़र उन गुलों का जवाब क्या जो क़दम-क़दम पे कुचल गए।
न है शायर अब ग़म-ए-नौ-ब-नौ न वो दाग़-ए-दिल न वो आरज़ू
जिन्हें एतमाद-ए-बहार था वो ही फूल रंग बदल गए।
–
हबीब = Beloved, Sweetheart
शिक़स्त = Breach, Breakage, Defeat
दीद = Sight
लतीफ़ = Juicy, Pleasant
ज़मील = Bonny, Attractive, Appealing
ख़िज़ाँ = Autumn, Decay
तीरगी = Darkness
ख़ुर्द = Little
रविश = The narrow pathways of the garden
नौ-ब-नौ = New, Fresh, Raw
एतमाद = Faith
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ज |
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Posted by Jaya
August 8, 2005
Lyricist: Kaleem Usmani
Singer: Mehdi Hasan
तेरे भीगे बदन की खुशबू से लहरें भी हुईं मस्तानी सी
तेरा ज़ुल्फ़ को छूकर आज हुई ख़ामोश हवा दीवानी सी।
ये रूप का कुंदन दहका हुआ ये जिस्म का चंदन महका हुआ
इलज़ाम न देना फिर मुझको हो जाए अगर नादानी सी।
बिखरा हुआ काजल आँखों में तूफ़ान की हलचल साँसों में
ये नर्म लबों की ख़ामोशी पलकों में छुपी हैरानी सी।
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Kaleem Usmani, त |
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Posted by Jaya
August 7, 2005
Lyricist: Qateel Shifai
Singer: Mehdi Hasan
ज़िन्दग़ी में तो सभी प्यार किया करते हैं
मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा।
तू मिला है तो ये अहसास हुआ है मुझको
ये मेरी उम्र मोहब्बत के लिए थोड़ी है।
इक ज़रा-सा ग़म-ए-दौराँ का भी हक़ है जिसपर
मैंने वो साँस भी तेरे लिए रख छोड़ी है।
तुझ पे हो जाऊँगा क़ुर्बान तुझे चाहूँगा
मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा।
अपना जज़्बात में नग़मात रचाने के लिए
मैंने धड़कन की तरह दिल में बसाया है तुझे।
मैं तसव्वुर भी जुदाई का भला कैसे करूँ
मैंने क़िस्मत की लकीरों से चुराया है तुझे।
प्यार का बन के निगाह-बान तुझे चाहूँगा
मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा।
तेरी हर चाप से जलते हैं ख़यालों में चिराग
जब भी तू आए जगाता हुआ जादू आए।
तुझको छू लूँ तो फिर ऐ जान-ए-तमन्ना मुझको
देर तक अपने बदन से तेरी खुशबू आए।
तू बहारों का है उनवान तुझे चाहूँगा।
मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा।
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तसव्वुर = Contemplation, Fancy, Idea,Imagination
निगाह-बान = Guard, Janitor, Keeper, Protector
उनवान = Form, Label, Legend, Preface, Title
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Krishan Adeeb |
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August 6, 2005
Lyricist:
Singer: Mehdi Hasan
जब कोई प्यार से बुलाएगा
तुमको एक शख़्स याद आएगा।
लज़्ज़त-ए-ग़म से आशना होकर
अपने महबूब से जुदा हो कर
दिल कहीं जब सुकून न पाएगा
तुमको एक शख़्स याद आएगा।
तेरे लब पे नाम होगा प्यार का
शमा देखकर जलेगा दिल तेरा
जब कोई सितारा टिमटिमाएगा
तुमको एक शख़्स याद आएगा।
ज़िन्दग़ी के दर्द को सहोगे तुम
दिल का चैन ढूँढ़ते रहोगे तुम
ज़ख़्म-ए-दिल जब तुम्हें सताएगा
तुमको एक शख़्स याद आएगा।
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Posted by Jaya
August 5, 2005
Lyricist: Krishan Adeeb
Singer: Mehdi Hasan
जब भी आती है तेरी याद कभी शाम के बाद
और बढ़ जाती है अफ़सुरदादिली शाम के बाद।
अब इरादों पे भरोसा है न तौबा पे यकीन
मुझको ले जाए कहाँ तिश्नालबी शाम के बाद।
यूँ तो हर लम्हा तेरी याद को बोझल गुज़रा
दिल को महसूस हुई तेरी कमी शाम के बाद।
मैं घोल रंगत-ए-रोशन करता हूँ बयाबानी
वरना डँस जाएगी ये तीरा-शबी शाम के बाद
दिल धड़कने की सदा थी कि तेरे कदमों की
किसकी आवाज़ सरे जाम सुनी शाम के के बाद।
यूँ तो कुछ शाम से पहले भी उदासी थी ‘अदीब’
अब तो कुछ और बढ़ी दिल की लगी शाम के बाद।
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अफ़सुरदादिली = Disappointment Of The Heart
तिश्ना = Thirst, Desire
तीरा = तीरागी = Darkness; तीरा-शबी = Darkness of Night
लगी = Longing, Love
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Krishan Adeeb |
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August 4, 2005
Lyricist: Jigar Muradabadi
Singer: Ghulam Ali
मेरा जो हाल हो सो हो बर्क़-ए-नज़र गिराए जा
मैं यों ही नालाँकश रहूँ तू यों ही मुसकुराए जा।
दिल के हर-एक गोशा में आग-सी इक लगाए जा
मुतरब-ए-आतिशी नवा हाँ इसी धुन में गाए जा।
जितनी भी आज पी सकूँ उज़्र न कर पिलाए जा
मस्त नज़र का वास्ता मस्त-नजर बनाए जा।
लुत्फ़ से हो कि कहर से होगा कभी तो रू-ब-रू
उसका जहाँ पता चले शोर वहीं मचाए जा।
इश्क को मुतमा-इन न रख हुस्न के एतमाद पे
वो तुझे आज़मा चुका तू उसे आज़माए जा।
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बर्क़ = Lightning
नालाँकश = One who is Lamenting
गोशा = Angle, Cell, Corner, Lobe, Privacy
मुतरब = मुतरिब = Singer
आतिशी = Of fire, Passionate
नवा = Sound
उज़्र = Excuse, Objection
मुतमा-इन = Satisfied, Content
एतमाद = ऐतमाद = Faith, Confidence
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Jigar Muradabadi, म |
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August 3, 2005
Lyricist: Qateel Shifai
Singer: Ghulam Ali
इसका रोना नहीं क्यों तुमने किया दिल बरबाद
इसका ग़म है कि बहुत देर में बरबाद किया।
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मेरी नज़र से न हो दूर एक पल के लिए
तेरा वज़ूद है लाज़िम मेरी ग़ज़ल के लिए।
कहाँ से ढूँढ़ के लाऊँ चराग से वो बदन
तरस गई हैं निग़ाहें कँवल-कँवल के लिए।
कि कैसा तजर्बा मुझको हुआ है आज की रात
बचा के धड़कनें रख ली हैं मैंने कल के लिए।
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क्या बेमुरौव्वत ख़ल्क़ है सब जमा है बिस्मिल के पास
तनहा मेरा क़ातिल रहा कोई नहीं क़ातिल के पास।
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‘क़तील’ ज़ख़्म सहूँ और मुसकुराता रहूँ
बने हैं दायरे क्या-क्या मेरे अमल के लिए।
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लाज़िम = Essential, Important, Necessary
ख़ल्क़ = World
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Qateel Shifai |
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August 2, 2005
Lyricist: Anwar Mirzapuri
Singer: Ghulam Ali
अपनी आवाज़ की लर्ज़िश पे तो क़ाबू पा लूँ
प्यार के बोल तो होठों से निकल जाते है
अपने तेवर तो सँभालो कोई ये न कहे
दिल बदलते हैं तो चेहरे भी बदल जाते हैं।
–
मैं नज़र से पी रहा हूँ ये समाँ बदल न जाए
न झुकाओ तुम निग़ाहें कहीं रात ढल न जाए।
मेरे अश्क भी हैं इसमें ये शराब उबल न जाए
मेरा जाम छूने वाले तेरा हाथ जल न जाए।
मेरी ज़िन्दग़ी के मालिक मेरे दिल पे हाथ रखना
तेरे आने की खुशी में मेरा दन निकल न जाए।
अभी रात कुछ है बाकी न उठा नक़ाब साकी
तेरा रिन्द गिरते गिरते कहीं फिर सँभल न जाए।
इसी ख़ौफ़ से नशेमन न बना सका मैं ‘अनवर’
कि निग़ाह-ए-अहल-ए-गुलशन कहीं फिर बदल न जाए।
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लर्ज़िश = Quiver
रिन्द = Drunkard
अहल = Inhabitant, People, Residents
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Anwar Mirzapuri |
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August 1, 2005
Lyricist: Ahmed Faraz
Singer: Ghulam Ali
करूँ ना याद मगर किस तरह भुलाऊँ उसे,
गज़ल बहाना करूँ और गुनगुनाऊँ उसे।
वो ख़ार-ख़ार है शाख-ए-गुलाब की मानिंद
मैं ज़ख़्म-ज़ख़्म हूँ फिर भी गले लगाऊँ उसे।
ये लोग तज़किरे करते हैं अपने प्यारों के
मैं किससे बात करूँ और कहाँ से लाऊँ उसे।
जो हमसफ़र सरे मंज़िल बिछड़ रहा है ‘फ़राज़’
अजब नहीं है अगर याद भी न आऊँ उसे।
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तज़किरे (तज़किरा) = Mention, Talk about
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Ahmed Faraz |
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