देख तो दिल कि जाँ से उठता है

July 18, 2005

Lyricist: Meer Taqi Meer
Singer: Mehdi Hasan

देख तो दिल कि जाँ से उठता है
ये धुआँ-सा कहाँ से उठता है।

गोर किस दिलजले की है ये फ़लक
शोला एक सुबह याँ उठता है।

बैठने कौन दे है फिर उसको
जो तेरे आसताँ से उठता है।

यूँ उठे आह उसगली से हम
जैसे कोई जहाँ से उठता है।


गोर = Tomb, Grave
फ़लक = Sky
याँ = यहाँ
आसताँ = Abode, Threshold


फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था

July 17, 2005

Lyricist: Adeem Hashmi
Singer: Ghulam Ali

फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था
सामने बैठा था मेरे और वो मेरा न था।

वो कि ख़ुशबू की तरह फैला था मेरे चार सू
मैं उसे महसूस कर सकता था छू सकता न था।

रात भर पिछली ही आहट कान में आती रही
झाँक कर देखा गली में कोई भी आया न था।

ख़ुद चढ़ा रखे थे तन पर अजनबीयत के गिलाफ़
वर्ना कब एक दूसरे को हमने पहचाना न था।

याद कर के और भी तकलीफ़ होती थी’अदीम’
भूल जाने के सिवा अब कोई भी चारा न था।

चार सू = In four directions, In all directions
गिलाफ़ = Cover, Envelope


बरसात की बहार है साक़ी शराब ला

July 16, 2005

Lyricist:
Singer: Munni Begam

बरसात की बहार है साक़ी शराब ला
ये रुत ही ख़ुशगवार है साक़ी शराब ला।

बाँगों में झूलती है हँसी किस अदा के साथ
इक-इक से हम-किनार है साक़ी शराब ला।

है साज़ भी छिड़ा हुआ मैकश भी जमा है
अब किसका इंतज़ार है साक़ी शराब ला।

गरमा रही हैं दिल को उमंगे शबाब की
हर मस्त बेकरार है साक़ी शराब ला।

क्या भूरी-भूरी छाई है मैख़ाने पर घटा
कैसी हसीं फुहार है साक़ी शराब ला।

हम-किनार = Embracing
मैकश = Boozer


गर्दिश-ए-दौराँ का शिकवा था मगर इतना न था

July 15, 2005

Lyricist: Ashoor Kazmi (I am not sure of this name)
Singer: Ghulam Ali

गर्दिश-ए-दौराँ का शिकवा था मगर इतना न था
तुम न थे तब भी मैं तनहा था मगर इतना न था।

दोस्ती के नाम पर पहले भी खाए थे फ़रेब
दोस्तों ने दर्द बख़्शा था मगर इतना न था।

तुमसे पहले ज़िन्दग़ी बे-कैफ़ थी बेनाम थी
रास्तों में घुप अँधेरा था मगर इतना न था।

तुम मिले तो बढ़ गई कुछ और दिल की बेकली
सिलसिला था बे-यकीन का मगर इतना न था।

हर तरफ चर्चे हैं अब मेरे तुम्हारे नाम के
शहर में ‘आशूर’ रुसवा था मगर इतना न था।


दिल धड़कने का सबब याद आया

July 14, 2005

Lyricist: Nasir Kazmi
Singer: Ghulam Ali

दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तेरी याद थी अब याद आया।

आज मुश्किल है सँभलना ऐ दोस्त
तू मुसीबत में अजब याद आया।

हाल-ए-दिल हम भी सुनाते लेकिन
जब वो रुख़सत हुए तब याद आया।

दिन गुज़ारा था बड़ी मुश्किल से
फिर तेरा वादा-ए-शब याद आया।

बैठ कर साया-ए-गुल में ‘नासिर’
हम बहुत रोये वो जब याद आया।


भटका भटका फिरता हूँ

July 13, 2005

Lyricist: Farhat Shahzad
Singer: Ghulam Ali

भटका भटका फिरता हूँ
गोया सूना पत्ता हूँ।

साथ ज़माना है लेकिन
तनहा तनहा रहता हूँ।

धड़कन धड़कन ज़ख़्मी है
फिर भी हँसता रहता हूँ।

जब से तुमको देखा है
ख़्वाब ही देखा करता हूँ।

तुम पर हर्फ़ न आ जाए
दीवारों से डरता हूँ।

मुझपर तो खुल जा ‘शहज़ाद’
मैं तो तेरा अपना हूँ।

हर्फ़ = blame, censure, reproach, stigma


ऐ हुस्न-ए-लाला फ़ाम ज़रा आँख तो मिला

July 12, 2005

Lyricist: Sagar Siddique
Singer: Ghulam Ali

ऐ हुस्न-ए-लाला फ़ाम ज़रा आँख तो मिला।
ख़ाली पड़े हैं जाम ज़रा आँख तो मिला।

कहते हैं आँखें आँख से मिलने है बंदगी
दुनिया के छोड़ काम ज़रा आँख तो मिला।

क्या वो ना आज आएँगे तारों के साथ-साथ
तनहाइयों की शाम ज़रा आँख तो मिला।

साक़ी मुझे भी चाहिए इक जाम-ए-आरज़ू
कितने लगेंगे दाम ज़रा आँख तो मिला।

हैं राह-ए-कहकशाँ में अज़ल से खड़े हुए
‘सागर’ तेरे ग़ुलाम ज़रा आँख तो मिला।


लाला = Flower
फ़ाम = Like, Resembling, Of the colour of, Approaching to the colour of
कहकशाँ = The milky-way, galaxy
अज़ल = Eternity without beginning, existence from eternity, beginning, source, origin


बका-ए-दिल के लिए ज्यों लहू ज़रूरी है

July 11, 2005

Lyricist: Farhat Shahzad
Singer: Ghulam Ali

दिल की बात ना मुँह तक लाकर अब तक हम दुख सहते हैं।
हमने सुना था इस बस्ती में दिल वाले भी रहते हैं।
एक हमें आवारा कहना कोई बड़ा इलज़ाम नहीं
दुनिया वाले दिल वालों को और बहुत कुछ कहते हैं।

बका-ए-दिल के लिए ज्यों लहू ज़रूरी है
इसी तरह मेरे जीवन में तू ज़रूरी है।

ये अक़्ल वाले नहीं अहल-ए-दिल समझते हैं
कि क्यों शराब से पहले वुज़ू ज़रूरी है।

ख़ुदा को मुँह भी दिखाना है एक दिन यारों
वफ़ा मिले ना मिले जुस्तजु ज़रूरी है।

कली उम्मीद की खिलती नहीं हर एक दिल में
हर एक दिल में मगर आरज़ू ज़रूरी है।

है एहतराम भी लाजिम कि ज़िक्र है उसका
जिगर का चाक भी होना रफ़ू ज़रूरी है।

बका = permanence, eternity, immortality
अहल-ए-दिल = Resident Of The Heart
वुज़ू = Ablution
जुस्तजु = Desire, Search
एहतराम = Respect
चाक = Slit, Torn
रफ़ू = Mending, Repair


ज़िन्दगी से यही ग़िला है मुझे

July 10, 2005

Lyricist: Ahmed Faraz
Singer: Ghulam Ali

ज़िन्दगी से यही ग़िला है मुझे
तू बहुत देर से मिला है मुझे।

हमसफ़र चाहिए हुजूम नहीं
मुसाफ़िर ही काफ़िला है मुझे।

दिल धड़कता नहीं सुलगता है
वो जो ख़्वाहिश थी आबला है मुझे

लबकुशा हूँ तो इस यक़ीन के साथ
क़त्ल होने का हौसला है मुझे।

कौन जाने कि चाहतों में ‘फ़राज़’
क्या गँवाया है क्या मिला है मुझे।


आबला = Blister

लबकुशा= Am not very sure, but see the following from Dictionary.

kushā = Opening, expanding; displaying; loosening; solving; revealing; conquering (used as last member of compounds, e.g. dilkushā, `heart-expanding’; — mushkil-kushā, `difficulty-solving’).

and “लब” means “lips”.

So, most like लबकुशा means “opening the lips” or speaking out. Thus, the meaning of the whole “sher” becomes - I open my mouth/speak out because I believe I have the courage to die.


सोचते और जागते साँसों का इक दरिया हूँ मैं

July 9, 2005

Lyricist: Athar Nafeez
Singer: Ghulam Ali

सोचते और जागते साँसों का इक दरिया हूँ मैं।
अपने गुमगश्ता किनारों के लिए बहता हूँ मैं।

जल गया सारा बदन इन मौसमों की आग में
एक मौसम रूह का है जिसपे अब ज़िंदा हूँ मैं।

मेरे होंठों का तबस्सुम दे गया धोखा तुझे
तूने मुझको बाग़ जाना देख ले सहरा हूँ मैं।

देखिए मेरी पज़ीराई को अब आता है कौन
लम्हा भर को वक़्त की दहलीज़ पे आया हूँ मैं।


गुमगश्ता = Errant, Lost, Missing, Wandering
तबस्सुम = Smile, Smiling
सहरा = Desert, Wilderness
पज़ीराई = Reception