July 31, 2005
Lyricist: Nazeer Qaisar
Singer: Ghulam Ali
वही पलकों का झपकना वही जादू तेरे
सारे अंदाज़ चुरा लाई है ख़ुशबू तेरे।
तुझसे मैं जिस्म चुराता था मगर इल्म न था
मेरे साये से लिपट जाएँगे बाज़ू तेरे ।
तेरी आँखों में पिघलती रही सूरत मेरी।
मेरी तसवीर पे गिरते रहे आँसू तेरे।
और कुछ देर अगर तेज़ हवा चलती रही
मेरी बाँहों में बिखर जाएँगे गेसू तेरे।
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Nazeer Qaisar |
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Posted by Jaya
July 30, 2005
लुत्फ़ जो उसके इंतज़ार में है
वो कहाँ मौसम-ए-बहार में है।
हुस्न जितना है गाहे-गाहे में
कब मुलाकात बार-बार में है।
जान-ओ-दिल से मैं हारता ही रहूँ
गर तेरी जीत मेंरी हार में है।
ज़िन्दगी भर की चाहतों का सिला
दिल में पैवस्त मू के ख़ार में है।
क्या हुआ गर खुशी नहीं बस में
मुसकुराना तो इख़्तियार में है।
–
पैवस्त = Absorb, Attach, Join
मू = Hair
ख़ार = A linen covering for a woman’s head, throat, and chin
इख़्तियार = Choice, Control, Influence, Option, Right
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Farhat Shahzad, ल |
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July 28, 2005
Lyricist: Rifat Sultan
Singer: Ghulam Ali
अब मैं समझा तेरे रुखसार पे तिल का मतलब
दौलत-ए-हुस्न पे दरबान बिठा रखा है।
–
बहारों के चमन याद आ गया है
मुझे वो गुलबदन याद आ गया है।
लचकती शाख ने जब सर उठाया
किसी का बाँकपन याद आ गया है।
मेरी ख़ामोशियों पर हँसने वालों
मुझे वो कमसुख़न याद ऐ गया है।
तेरी सूरत को जब देखा है मैंने
उरूज-ए-फ़िक्र-ओ-फ़न याद आ गया है।
मिले वो बन कर अजनबी तो ‘रिफ़त’
जमाने का चलन याद आ गया है।
–
Do not know what उरूज-ए-फ़िक्र-ओ-फ़न mean. Any help?
–
बाँकपन = Slyness
कमसुख़न = One who speaks less
उरूज = Ascent
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Rifat Sultan |
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July 27, 2005
Lyricist: Ahmed Faraz
Singer: Ghulam Ali
जो भी दुख याद न था याद आया
आज क्या जानिए क्या याद आया।
याद आया था बिछड़ना तेरा
फिर नहीं याद कि क्या याद आया।
हाथ उठाए था कि दिल बैठ गया
जाने क्या वक़्त-ए-दुआ याद आया।
जिस तरह धुंध में लिपटे हुए फूल
इक इक नक़्श तेरा याद आया।
ये मोहब्बत भी है क्या रोग ‘फ़राज़’
जिसको भूले वो सदा याद आया।
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Ahmed Faraz |
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July 26, 2005
Lyricist:
Singer: Ghulam Ali
अपनी ग़ज़लों में तेरा हुस्न सुनाऊँ आ जा
आ ग़म-ए-यार तुझे दिल में बसाऊँ आ जा।
बिन किए बात तुझे बात सुनाकर दिल की
तेरी आँखों में हया रंग सजाऊँ आ जा।
अनछुए होंठ तेरे एक कली से छू कर
उसको मफ़हूम नज़ाक़त से मिलाऊँ आ जा।
मैंने माना कि तू साक़ी है मैं मैकश तेरा
आज तू पी मैं तुझे जाम पिलाऊँ आ जा।
हीर वारिस की सुनाऊँ मैं तुझे शाम ढले
तुझमें सोए हुए जज़्बों को जगाऊँ आ जा।
ऐं मेरे सीने में हर आन धड़कती ख़ुशबू
आ मेरे दिल में तुझे तुझसे मिलाऊँ आ जा।
–
मफ़हूम = To be taken to mean, Understood
हीर वारिस की: This is an explanation and not a meaning. The famous Punjabi poetry “Heer Ranjha” was written by Warris Shah. This is what is being referred to here.
आन = Moment
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July 26, 2005
Lyricist: Nasir Kazmi
Singer: Ghulam Ali
दुख की लहर ने छेड़ा होगा
याद ने कंकड़ फेंका होगा।
आज तो मेरा दिल कहता है
तू इस वक़्त अकेला होगा।
मेरे चूमे हुए हाथों से
औरों के ख़त लिखता होगा।
यादों की जलती शबनम से
फूल-सा मुखड़ा धोया होगा।
मोती जैसी शकल बनाकर
आइने को तकता होगा।
मैं तो आज बहुत रोया हूँ
तू भी शायद रोया होगा।
‘नासिर’ तेरा मीत पुराना
तुझको याद तो आता होगा।
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Nasir Kazmi |
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July 25, 2005
Lyricist:Ahsoor??
Singer: Ghulam Ali
तुम आ गए हो ऐ शह-ए-ख़ूबाँ ख़ुशामदीद
महका है आज दिल का गुलिस्ताँ ख़ुशामदीद।
उतरा है मेरी रूह के आँगन मे सैल-ए-नूर
गुरबत कदे में जश्न-ए-चरागाँ ख़ुशामदीद।
मिस्ल-ए-नसीम सुबह-ए-चमन हों सुबक खराम
इक इक क़दम नवेद-ए-बहाराँ ख़ुशामदीद।
जज़्बों को फिर यक़ीन की दौलत मिली आज
वजह-ए-करार-ए-क़ल्ब परीशाँ ख़ुशामदीद।
बरसों के बाद दिल में उजालों की है नुमू
मेहर-ए-मुनीर नैयर ताबाँ ख़ुशामदीद।
जाना तुम्हारी चश्म-ए-मोहब्बत का फ़ैज़ है
‘आशूर’ भी है आज ग़ज़लफ़ाँ ख़ुशामदीद।
–
ख़ूबाँ = The fair, The beautiful, Sweetheart, Lady-love
ख़ुशामदीद = Welcome
सैल = Short for सैलाब = Flood, Deluge, Torrent
नूर = Bright, Light, Luminescence, Luster, Refulgence
गुरबत = Exile
कद = A retreat, A den, A cavern
मिस्ल = Analogous, Example, Like, Record, Resembling
नसीम = Gentle Breeze, Zephyr
सुबक खराम = Jink
नवेद = Good News
नवेद-ए-बहाराँ = Call of Spring
क़ल्ब = Heart
वजह-ए-करार-ए-क़ल्ब = The reason of the calmness of the heart
परीशाँ = Having the disposition of a fairy, Like fairy
नुमू = Growth
मेहर-ए-मुनीर = Sunlight
नैयर = Lightsome, Luminous
ताबाँ = Hot, Burning, Light, Luminous, Shining, Radiant
चश्म = Eye
फ़ैज़ = Favour
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त |
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July 25, 2005
Lyricist: Nasir Kazmi
Singer: Ghulam Ali
दिल में और तो क्या रखा है
तेरा दर्द छुपा रखा है।
इतने दुखों की तेज़ हवा में
दिल का दीप जला रखा है।
इस नगरी के कुछ लोगों ने
दुख का नाम दवा रखा है।
वादा-ए-यार की बात न छेड़ो
ये धोखा भी खा रखा है।
भूल भी जाओ बीती बातें
इन बातों में क्या रखा है।
चुप चुप क्यों रहते हो ‘नासिर’
ये क्या रोग लगा रखा है।
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Nasir Kazmi |
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July 25, 2005
Lyricist: Farhat Sahzad
Singer: Mehdi Hasan
खुली जो आँख तो वो था न वो ज़माना था
दहकती आग थी तनहाई थी फ़साना था।
ग़मों ने बाँट लिया मुझे यूँ आपस में
कि जैसे मैं कोई लूटा हुआ ख़ज़ाना था।
ये क्या चंद ही क़दमों पे थक के बैठ गए
तुम्हें तो साथ मेरा दूर तक निभाना था।
मुझे जो मेरे लहू में डुबो के गुज़रा है
वो कोई ग़ैर नहीं यार एक पुराना था।
ख़ुद अपने हाथ से ‘शहज़ाद’ उसे काट दिया
कि जिस दरख़्त के तनहाई पे आशियाना था।
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Farhat Shahzad |
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July 24, 2005
Lyricist: Farhat Shahzad
Singer: Mehdi Hasan
एक बस तू ही नहीं मुझसे ख़फ़ा हो बैठा
मैंने जो संग तराशा वो ख़ुदा हो बैठा।
उठ के मंज़िल ही अगर आए तो शायद कुछ हो
शौक-ए-मंज़िल तो मेरा आबलापा हो बैठा।
शुक्रिया ऐ मेरे क़ातिल ऐ मसीहा मेरे
ज़हर जो तूने दिया था वो दवा हो बैठा।
–
संग = Stone
आबलापा = Having Blistered Feet
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Farhat Shahzad, ए |
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