मेरा जज़्ब-ए-मोहब्बत कम न होगा

June 30, 2005

Lyricist: Sant Darshan Singh
Singer: Ghulam Ali

मेरा जज़्ब-ए-मोहब्बत कम न होगा
जहान-ए-आरज़ू बरहम न होगा।

बढ़ेगा मेरी दुनिया में उजाला
चिराग-ए-सोज़-ए-ग़म मद्धम न होगा।

जहाँ में आब गिल से मावरा भी
तेरा दर्द-ए-मोहब्बत कम न होगा।

तेरे दर पर जो सर ख़म हो गया है
वो अब दुनिया के आगे ख़म न होगा।

लड़ूँगा गर्दिश-ए-दौराँ से ‘दर्शन’
में जोश-ए-अमल अब कम न होगा।

Okay - so now the word meanings are all correct. Only undeciphered part is the meaning of the line in bold.

बरहम = Spoiled
सोज़ = Burning, Exciting, Passionate
आब = Brilliance, Brightness
गिल = Earth, Mud
मावरा = Extra
ख़म = Bend
गर्दिश = Misfortune
दौराँ = Time


ये दिल, ये पागल दिल मेरा

June 29, 2005

Lyricist: Mohsin Naqvi
Singer: Ghulam Ali

अंदाज़ अपने देखते हैं आईने में वो
और ये भी देखते हैं कि कोई देखता न हो।

ये दिल, ये पागल दिल मेरा क्यों बुझ गया, आवारगी
इस दश्त में इक शहर था वो क्या हुआ, आवारगी।

कल शब मुझे बेशक्ल सी आवाज़ ने चौंका दिया
मैंने कहा तू कौन है उसने कहा आवारगी।

इक अजनबी झोंके ने जब पूछा मेरे ग़म का सबब
सहरा की भीगी रेत पर मैंने लिखा आवारगी।

ये दर्द की तनहाइयाँ, ये दश्त का वीराँ सफ़र
हम लोग तो उकता गये अपनी सुना, आवारगी।

कल रात तनहा चाँद को देखा था मैंने ख़्वाब में
‘मोहसिन’ मुझे रास आएगी शायद सदा आवारगी।

दश्त = Desert
शब = Night
सबब = Reason


अल्लाह, अल्लाह, लुत्फ क्या साकी के मैख़ाने में है

June 29, 2005

Lyricist: Sant Darshan Singh
Singer: Ghulam Ali

अल्लाह, अल्लाह, लुत्फ क्या साकी के मैख़ाने में है
जलवागरी राग-ए-दो-आलम उसके पैमाने में है।

दैर में क्या जुस्तजू है, क्या है काबे में तलाश
चश्म-ए-बा-तिन खोल वो दिल के सनमखाने में है।

कौन जाने क्या तमाशा है कि हादी के बग़ैर
इक हुजूम-ए-नगमदीर दिल के दवाखाने में है।

बैठै-बैठै ख़ुद मुझे होता है अक्सर ये गुमाँ
नगमगर मुतरिब कोई दिल के तलबखाने में है।

जिन्दगी मे तुझको ‘दर्शन’ मिल नहीं सकता कहीं
वो सुरूर-ए-कैफ़ जो मुज़्जत के खुमखाने मे है।


जलवागरी = Manifestation
राग = Melody
दो-आलम = Two Worlds
दैर = Temple
जुस्तजू = Desire, Search, Inquiry
चश्म = Eye
बा-तिन = Conscience
हादी = Instruments
मुतरिब = Singer
सुरूर = Joy, Pleasure, Rapture
कैफ़ = Happiness
खुम = Wine


इससे पहले कि बात टल जाए

June 28, 2005

Lyricist: Farhat Shahzad
Singer: Ghulam Ali

इससे पहले कि बात टल जाए
आओ इक दौर और चल जाए।

आँसुओं से भरी हुई आँखें
रोशनी जिस तरह पिघल जाए।

दिल वो नादान, शोख बच्चा है
आग छूने से जो मचल जाए।

तुझको पाने की आस के सर से
जिन्दगी की रिदा ना ढल जाए।

वक़्त, मौसम, हवा का रुख जाना
कौन जाने कि कब बदल जाए।

रिदा = Cloak


आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक

June 28, 2005

Lyricist: Mirza Ghalib
Singer: Jagjeet Singh

आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक
कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक।

आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब
दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होने तक।

हम ने माना कि तग़ाफुल न करोगे लेकिन
ख़ाक हो जाएँगे हम तुमको ख़बर होने तक।

ग़म-ए-हस्ती का ‘असद’ किस से हो जुज़ मर्ग इलाज
शमा हर रंग में जलती है सहर होने तक।


सब्र-तलब = Desiring/Needing Patience
तग़ाफुल = Ignore/Neglect
जुज़ = Except/Other than
मर्ग = Death
शमा = Lamp/Candle
सहर = Dawn/Morning


नज़र नज़र से मिलाकर शराब पीते हैं

June 27, 2005

Lyricist: Tasneem Farooqui
Singer: Jagjeet Singh

नज़र नज़र से मिलाकर शराब पीते हैं
हम उनको पास बिठाकर शराब पीते हैं।

इसीलिए तो अँधेरा है मैकदे में बहुत
यहाँ घरों को जलाकर शराब पीते हैं।

हमें तुम्हारे सिवा कुछ नज़र नहीं आता
तुम्हें नज़र में सजा कर शराब पीते हैं।

उन्हीं के हिस्से आती है प्यास ही अक्सर
जो दूसरों को पिला कर शराब पीते हैं।


दिल-ए-नादान तुझे हुआ क्या है

June 27, 2005

Lyricist: Mirza Ghalib
Singer: Jagjeet Singh, Chitra Singh

दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है?

हमको उनसे वफ़ा की है उम्मीद
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है।

हम हैं मुश्ताक़ और वो बेज़ार
या इलाही ये माजरा क्या है।

जब कि तुझ बिन नहीं कोई मौजूद
फिर ये हंगामा ऐ ख़ुदा क्या है।

जान तुम पर निसार करता हूँ
मैंने नहीं जानता दुआ क्या है।


मुश्ताक़ = Eager, Ardent
बेज़ार = Angry, Disgusted


जब कभी साकी-ए-मदहोश की याद आती है

June 27, 2005

Lyricist: Sant Darshan Singh
Singer: Ghulam Ali

जब कभी साकी-ए-मदहोश की याद आती है
नशा बन कर मेरी रग-रग में समा जाती है।

डर ये है टूट ना जाए कहीं मेरी तौबा
चार जानिब से घटा घिर के चली आती है।

जब कभी ज़ीस्त पे और आप पे जाती है नज़र
याद गुज़रे हुए ख़ैय्याम की आ जाती है।

मुसकुराती है कली, फूल हँसे पड़ते हैं
मेरे महबूब का पैग़ाम सबा लाती है।

दूर के ढोल तो होते हैं सुहाने ‘दर्शन’
दूर से कितनी हसीन बर्क़ नज़र आती है।

जानिब = In the direction
ज़ीस्त = Life
सबा = Breeze
बर्क़ = Lightning


ज़ुल्फ़ बिखरा के निकले वो घर से

June 26, 2005

Lyricist: Bekal Utsahi
Singer: Hussain Brothers

ज़ुल्फ़ बिखरा के निकले वो घर से
देखो बादल कहाँ आज बरसे।

फिर हुईं धड़कनें तेज़ दिल की
फिर वो गुज़रे हैं शायद इधर से।

मैं हर एक हाल में आपका हूँ
आप देखें मुझे जिस नज़र से।

ज़िन्दग़ी वो सम्भल ना सकेगी
गिर गई जो तुम्हारी नज़र से।

बिजलियों की तवाजों में ‘बेकल’
आशियाना बनाओ शहर से।

तवाजों = Hospitality


दो जवाँ दिलों का ग़म दूरियाँ समझती हैं

June 26, 2005

Lyricist: Danish Aligarhi
Singer: Hussain Brothers

दो जवाँ दिलों का ग़म दूरियाँ समझती हैं
कौन याद करता है हिचकियाँ समझती हैं।

तुम तो ख़ुद ही क़ातिल हो, तुम ये बात क्या जानो
क्यों हुआ मैं दीवाना बेड़ियाँ समझती हैं।

बाम से उतरती है जब हसीन दोशीज़ा
जिस्म की नज़ाक़त को सीढ़ियाँ समझती हैं।

यूँ तो सैर-ए-गुलशन को कितना लोग आते हैं
फूल कौन तोड़ेगा डालियाँ समझती हैं।

जिसने कर लिया दिल में पहली बार घर ‘दानिश’
उसको मेरी आँखों की पुतलियाँ समझती हैं।


बाम = Terrace, Rooftop
दोशीज़ा = Bride